देखें वीडियो, सीबीआई कार्यालय का घेराव, अब की जाएगी तालाबंदी
पढ़ें, चुनावी मौसम में सुस्त सीबीआई जांच पर नयी जंग शुरू
अविकल थपलियाल
देहरादून। अंकिता मर्डर केस की सुस्त सीबीआई जांच को लेकर एक बार फिर गुस्सा फूट पड़ा। और नए जंग की इबारत लिखी जाने लगी है। पहले दिल्ली में और अब दून में महिला आंदोलनकारियों ने बिगुल फूंक दिया है।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले सोमवार को देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय का घेराव कर अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच में हुई प्रगति के संबंध जमकर नारेबाजी की गई। झड़प भी हुई और नारेबाजी भी।
प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई से मांग की कि छह माह से चल रही जांच की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक किया जाए तथा जांच से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर दिए जाएं।
प्रदर्शन के दौरान मंच के कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। प्रारंभ में सीबीआई अधिकारियों ने कार्यालय का गेट बंद कर दिया तथा प्रदर्शनकारियों को भीतर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके उपरांत चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सीबीआई कार्यालय के भीतर बुलाया गया।
प्रतिनिधिमंडल में कमला पंत, निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल व मोहित डिमरी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने सीबीआई के डीएसपी अजय मिश्रा एवं डीएसपी सुभाष चंद्र से मुलाकात कर जांच में देरी और सीबीआई की कार्य प्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए ज्ञापन सौंपा।
मुलाकात के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दिल्ली में दर्ज की गई है। मंच ने कहा कि यदि ऐसा है तो एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए तथा जांच की वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सीबीआई अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मंच द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और उसमें उठाए गए सभी प्रश्नों एवं चिंताओं को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय के सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
ज्ञापन में मंच ने सीबीआई से पूछा है कि छह माह की जांच के दौरान अब तक क्या प्रगति हुई है? क्या दुष्यंत गौतम एवं अजेय कुमार से पूछताछ की गई है? क्या अंकिता के माता-पिता द्वारा उठाए गए प्रश्नों को जांच का हिस्सा बनाया गया है? क्या उर्मिला सनावर द्वारा सार्वजनिक रूप से उठाए गए मुद्दों पर जांच हुई है, तथा क्या साक्ष्य मिटाने अथवा जांच को प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच की गई है।
मंच ने यह भी मांग की कि जांच की वर्तमान स्थिति, आगे की कार्ययोजना तथा जांच पूर्ण होने की संभावित समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने सीबीआई को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता है, तो मंच व्यापक जनभागीदारी के साथ आंदोलन के अगले चरण की घोषणा करेगा । और देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय की तालाबंदी अभियान शुरू करेगा। इसके लिए संपूर्ण जिम्मेदारी सीबीआई प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन एवं घेराव कार्यक्रम में पदमा गुप्ता, मंजू बलोदी, बिमला, स्मृति नेगी, सुशीला अमोली, पुष्पा नौडियाल, गीता बागड़ी, हिलता नेगी, ज्योति नेगी, मीणा राणा, यशोदा, शांता नैथानी, प्रेमलता बलूनी, शांति सेमवाल, सतेश्वरी देवी सहित भारी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया । और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के पक्ष में CBI कार्यालय के मुख्य द्वार पर जोरदार नारे लगाए।
मंच ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक परिवार का नहीं बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय और जनता के विश्वास का प्रश्न है तथा इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास का प्रश्न है। हमारा उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुँचना नहीं, बल्कि यह जानना है कि जांच किस स्थिति में है और जिन सवालों को परिवार तथा समाज लगातार उठा रहा है, उनका परीक्षण किस प्रकार किया जा रहा है।
छह माह का समय बीत जाने के बाद भी जांच की प्रगति को लेकर अनेक प्रश्न बने हुए हैं। मंच का मानना है कि पारदर्शिता से ही जनता का विश्वास मजबूत होता है। इसलिए हमने सीबीआई से जांच की वर्तमान स्थिति और आगे की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देने का अनुरोध किया है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि
किसी भी लोकतांत्रिक समाज में न्याय की प्रक्रिया जितनी निष्पक्ष होनी चाहिए, उतनी ही पारदर्शी भी होनी चाहिए।
..चुनावी मौसम में सुस्त सीबीआई जांच पर नयी जंग शुरू
गौरतलब कि पदम् पुरस्कार से सम्मानित डॉ अनिल जोशी ने जनवरी 2026 में धामी सरकार की सीबीआई जांच की घोषणा के बाद एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मुद्दे पर भी घमासान मच गया था।
अंकिता के माता-पिता ने कथित वीआईपी के तौर पर तत्कालीन संगठन मंत्री अजेय कुमार और प्रभारी दुष्यंत गौतम का खुलेआम नाम लिया था।
इसके अलावा दिसम्बर 2025 में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर व अभिनेत्री उर्मिला सनावर की पारस्परिक बातचीत में भी दुष्यंत गौतम व अजेय कुमार का नाम सामने आया था।
यह ‘खुलासा’ होते ही जनता सड़कों पर उतर आई थी। जनवरी 2026 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता की मांग और बढ़ते जन-आंदोलन के बाद आधिकारिक तौर पर सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
इसके बाद, फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में सीबीआई ने दिल्ली में अज्ञात वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अपनी जांच शुरू की और टीम उत्तराखंड पहुंच गई थी।
चार जून को उत्तराखंड के दौरे पर आए राहुल गांधी ने अंकिता के माता -पिता से वीडियो कॉल पर बातचीत कर न्याय दिलाने की मांग की थी।
इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मई के अंतिम सप्ताह में उत्तराखंड दौरे पर आने के बाद बदलाव का फैसला लिया गया। और संगठन महामंत्री अजेय कुमार को बड़े राज्य राजस्थान भेज दिया गया। बड़े राज्य का संगठन महामंत्री बनाये जाने पर भी राजनीतिक व सामाजिक स्तर और भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
वनन्तरा रिसॉर्ट की कर्मी 19 वर्षीया अंकिता भंडारी का मर्डर सितंबर 2022 में हुआ था। पौड़ी गढ़वाल निवासी अंकिता की लाश चीला नहर से बरामद की गई थी। आंदोलन भड़कने के बाद पुलिस ने भाजपा नेता विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इन तीनों को मई 2025 में कोटद्वार की कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
कोर्ट के निर्णय के बाद धामी सरकार ने उठे जनज्वार के बाद सीबीआई जांच का फैसला लिया। 2027 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से ठीक पूर्व अंकिता भंडारी मामले की सीबीआई जॉच की लेटलतीफी प्रमुख राजनीतिक व सामाजिक मुद्दा बनती जा रही है। इस चर्चित मामले में सीबीआई जांच के फैसले से दलीय व आंदोलनात्मक राजनीति भी नयी करवट बैठेगी।
खबर यह भी है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल अंकिता के माता-पिता को दिल्ली में राहुल गांधी से मिलवाएंगे। इस मुलाकात के बाद सीबीआई जांच और कथित वीआईपी का मसला नयी शक्ल अख्तियार करेगा….



