कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं पर फिजिबिलिटी स्टडी करा रहा जलागम विभाग
उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के तहत होगा कार्य
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। कार्बन क्रेडिट के जरिए प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने के लिए जलागम विभाग ने शुरुआती कदम बढ़ा लिए हैं। इसके पहले चरण में फिजिबिलिटी स्टडी को लेकर इस क्षेत्र में कार्य कर रही हैदराबाद की कंपनी कोर कार्बन एक्स के साथ सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। कोर कार्बन एक्स अगले छह माह में फिजिबिलिटी रिपोर्ट सौंपेगी। यह कार्य विश्व बैंक वित्त पोषित उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के अंतर्गत किया जा रहा है।
परियोजना प्रदेश के आठ जिलों की 519 ग्राम पंचायतों में संचालित है। परियोजना के प्रमुख घटकों में किसानों द्वारा छोड़ी गई कृषि योग्य भूमि पर कृषि-औद्यानिकी मॉडल से कार्बन क्रेडिट का लाभ किसानों तक पहुंचाना शामिल है। कार्बन क्रेडिट के कृषि-औद्यानिकी मॉडल से चयनित क्षेत्रों में न सिर्फ उत्पादकता में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि किसानों को कार्बन क्रेडिट से एक नियमित आय भी प्राप्त होगी। कोर कार्बन एक्स अल्मोड़ा, नैनीताल, उधमसिंहनगर, पौड़ी, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग जिलों के चयनित परियोजना क्षेत्र में कार्य करेगी। परियोजना क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन करने के बाद कंपनी फिजिबिलिटी रिपोर्ट में कार्बन क्रेडिट के लिए उपलब्ध जमीन व इच्छुक किसानों का विवरण उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही कंपनी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि कार्बन क्रेडिट हासिल करने के लिए कौन-कौन सी गतिविधियां की जाएंगी।
कार्बन क्रेडिट के रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक प्रोजेक्ट डेवलपमेंट डाक्यूमेंट (पीडीडी) भी कोर कार्बन एक्स द्वारा तैयार किया जाएगा।
जलागम विभाग की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि आश्यकता पड़ने पर परियोजना क्षेत्र के आसपास के इलाके को भी अध्ययन में शामिल किया जाएगा, ताकि कार्बन क्रेडिट के लिए एक बेहतर योजना तैयार की जा सके। “प्रदेश के किसानों के दीर्घकालिक लाभ के लिए कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। जलागम विभाग के माध्यम से तैयार इस प्रोजेक्ट को भविष्य में मॉडल के रूप में प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी लिया जा सकेगा। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरणीय नजरिए से भी यह काफी लाभप्रद होगा।”



