यूआईआईडीबी सरकारी जमीनों का सुनियोजित उपयोग कर रहा- भाजपा
भूमि की लीज और मालिकाना हक पर छिड़ी बहस
भाजपा, खाली जमीनों को रोजगार का जरिया बना रही- चमोली
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। करोड़ों मूल्य की सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की जारी कवायद को लेकर कांग्रेस व भाजपा में बुरी तरह ठन गयी है। हल्द्वानी के चर्चित शुद्धिकरण विवाद के बीच नेता विपक्ष यशपाल आर्य के ‘जमीनी’ प्रहार के बाद भाजपा खेमे ने भी कांग्रेस शासन में हुई जमीनों की बंदरबांट का मुद्दा उठा दिया।
गौरतलब है कि गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश की सात हजार बीघा सरकारी भूमि को लीज पर दिए जाने सम्बन्धी खबरों को लेकर कई सवाल उठाए थे।
इस बीच, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता व विधायक विनोद चमोली ने कहा कि कांग्रेस को प्रदेश के विकास और सरकारी भूमि से जुड़े तथ्यों पर राजनीति करने के बजाय पहले अपने शासनकाल का रिकॉर्ड देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास उत्तराखंड और जनहित के मुद्दों पर विरोधाभासी रहा है। जिस कांग्रेस ने उत्तराखंड राज्य निर्माण का विरोध किया, वही आज प्रदेश में तेजी से हो रहे ढांचागत और आर्थिक विकास को देखकर बौखलाहट में निराधार आरोप लगा रही है।
विनोद चमोली ने कहा कि अपने शासनकाल में बेशकीमती जमीनों की बंदरबांट करने वाली कांग्रेस नेता आज किस मुंह से सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस बताए कि आईटी पार्क देहरादून की जिस जमीन पर आईटी इंडस्ट्री विकसित होनी थी, उसे बिल्डरों को कौड़ियों के दाम पर किसने बेचा?
सिटी पार्क लैंडयूज वाली जमीन का लैंड यूज बिना पैसा जमा कराए बदलकर राज्य को करोड़ों के राजस्व का नुकसान किसने पहुँचाया? वर्ष 2006 में सिडकुल के माध्यम से सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को कौड़ियों के भाव भूमि किसने दी और 2013 में देहरादून आईटी पार्क में जीटीएम बिल्डर को जमीन देकर सीएजी (CAG) ऑडिट आपत्तियों का कारण कौन बना?
भाजपा प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ‘बंदरबांट’ और ‘अपने करीबियों को लाभ पहुँचाने’ का जो आरोप नेता प्रतिपक्ष लगा रहे हैं, वह दरअसल कांग्रेस का अपना पुराना इतिहास और कार्यशैली रही है। कांग्रेस के समय में मालिकाना हक देकर जमीनों की बंदरबांट की गई, जबकि वर्तमान धामी सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी है।
उत्तराखंड की जमीन किसी को बेची नहीं जा रही है, बल्कि भूमि का मालिकाना हक पूरी तरह से राज्य सरकार के पास ही रहेगा। निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के तहत केवल लीज (Lease) मॉडल के माध्यम से निवेश को आकर्षित किया जा रहा है।

चमोली ने कहा कि पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में यदि भूमि वर्षों तक अनुपयोगी पड़ी रहे तो उससे न रोजगार पैदा होता है और न ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है। यूआईआईडीबी (UIIDB) के माध्यम से खाली पड़ी सरकारी जमीनों का सुनियोजित उपयोग कर पर्यटन, वेलनेस, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश लाया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के शासनकाल में उद्योगों और निजी आवासीय परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराई गई, तब क्या वह विकास था? और आज जब धामी सरकार राज्य का स्वामित्व बरकरार रखते हुए पर्यटन और वेलनेस क्षेत्र में रोजगार लाने के लिए लीज नीति अपना रही है, तो कांग्रेस के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? प्रदेश की जागरूक जनता कांग्रेस के इस विकास विरोधी चेहरे को पूरी तरह पहचान चुकी है और उनके इस भ्रामक व नकारात्मक एजेंडे को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
कुल मिलाकर सरकारी जमीनों को लीज पर दिए जाने और उसके मालिकाना हक को लेकर उठे संशय को अभी तक शासन स्तर पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। कांग्रेस ने अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया है।
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हजारों बीघा सरकारी जमीन के व्यावसायिक उपयोग पर कांग्रेस हमलावर



