मलेशिया के साथ संस्कृत-रामायण संबंधों पर भी चर्चा

यज्ञ से ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ

अविकल उत्तराखण्ड


देहरादून। उत्तराखंड में संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत एवं सांस्कृतिक संबंधों को विस्तार देने की दिशा में पहल की गई है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने हरिद्वार में यज्ञ के साथ ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया, वहीं नई दिल्ली में मलेशिया उच्चायोग के अधिकारियों के साथ संस्कृत, रामायण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की।
हरिद्वार में सेवा संकल्प अभियान के तहत संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन सचिव दीपक कुमार ने ऋषिकुल विद्यापीठ ब्रह्मचर्याश्रम संस्कृत महाविद्यालय की प्राचीन यज्ञशाला में हवन-पूजन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
इस अवसर पर दीपक कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन कर्मयोग की ओर प्रेरित करने वाला अवसर है। देश के विकास और नागरिकों के कल्याण के लिए उनकी सेवा, समर्पण और कर्तव्यबोध अनुकरणीय है। उन्होंने संस्कृत छात्रों से कहा कि वे स्वयं को हीन भावना से न देखें। संस्कृत छात्रों के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रो. विनय विद्यालंकार ने वेदों के महत्व और यज्ञ की प्राचीन विधाओं पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन भारत के विकास मॉडल को आधार बनाकर विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाया जा रहा है। रूस से आए ज्योतिषी राजीव गुप्ता ने कहा कि विश्व में भारत को सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है।

सशक्त भारत के निर्माण में संस्कृत भाषा और संस्कृत भाषियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ऋषिकुल विद्यापीठ के प्रधानाचार्य डॉ. बलदेव प्रसाद चमोली ने की और संचालन डॉ. नवीन चंद्र पंत ने किया। इस दौरान नगर मजिस्ट्रेट हरिगिरि, संस्कृत शिक्षा के उपनिदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य, आचार्य चूड़ामणि परगाईं, भास्कर शर्मा, महेश बहुगुणा, रमेश जोशी, उमा जोशी, चंपा जोशी, मनोज कुमार शर्मा, दीपक नागर, अमित शर्मा और सोहन शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। अतिथियों को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।


मलेशिया के साथ संस्कृत-रामायण पर सहयोग की पहल
नई दिल्ली में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने मलेशिया उच्चायोग में चार्ज डी’अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा से मुलाकात की। बैठक में भारत और मलेशिया के बीच उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार के साथ द्विपक्षीय सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और भाषाई संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
दीपक कुमार ने मलेशिया के विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार तथा संस्कृत संस्थानम के साथ जोड़ने के लिए आठ बिंदुओं वाली कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसमें भारत और मलेशिया के बीच रामायण और संस्कृत के माध्यम से सांस्कृतिक संबंध मजबूत करना, दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों एवं प्रोफेसरों का एक्सचेंज कार्यक्रम तथा वाल्मीकि रामायण और ‘हिकायत सेरी रामा’ का तुलनात्मक अध्ययन शामिल है।
बैठक में दक्षिण-पूर्व एशिया में रामायण को भारत और मलेशिया की साझा विरासत के रूप में अध्ययन करने तथा दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया के भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय अथवा संस्कृत संस्थानम में मलेशिया के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया।
मलेशियाई उच्चायोग की अधिकारी ने प्रस्तावों को महत्वपूर्ण बताते हुए भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने उत्तराखंड में बदरीनाथ और केदारनाथ सहित चारधाम होने तथा संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त होने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय को इस संबंध में कॉन्सेप्ट नोट तैयार कर आगे की कार्रवाई करने का सुझाव दिया।
बैठक में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. डॉ. अरविंद नारायण मिश्र मौजूद रहे। मलेशिया उच्चायोग के फर्स्ट सेक्रेटरी (पॉलिटिकल) अहमद रादजी मोहम्मद जिम भी बैठक में शामिल हुए।

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