मोबाइल पर कोडिंग सिखाने वाले स्टार्टअप Efiwe ने लगाई छलांग

TechCrunch के टॉप 200 में चयन

उत्तराखंड से सिलिकॉन वैली तक

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तराखंड के युवा उद्यमी अभिनव नेगी और नाइजीरिया के चिडी नवाओगू की अनोखी पहल ने वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन किया है। उनकी शैक्षिक प्रौद्योगिकी कंपनी Efiwe – ईफिवे का चयन दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित स्टार्टअप मंच TechCrunch Startup Battlefield 200 के लिए हुआ है।

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 13 से 15 अक्टूबर तक आयोजित TechCrunch Disrupt 2026 में दुनिया भर से चुने गए 200 उभरते स्टार्टअप्स के बीच Efiwe ने अपनी तकनीक का प्रदर्शन किया।

इस वैश्विक आयोजन में कंपनी का प्रतिनिधित्व रणनीतिक सलाहकार मुद्दित त्यागी और तीन युवा Efiwe एंबेसडर अविनाश, पूजा और विशाल ने किया। मुद्दित त्यागी ने Startup Battlefield Pitch Showcase के मंच पर दो मिनट की प्रभावी पिच दी, जबकि टीम ने बूथ नंबर C26 पर निवेशकों और संभावित साझेदारों के सामने तकनीक का लाइव डेमो दिया।

Efiwe की सोच शिक्षा की सबसे बड़ी बाधा पर चोट करती है – महंगे कंप्यूटर और लैपटॉप।

भारत में आज भी कई स्कूलों में कंप्यूटर लैब की उपलब्धता असमान है, जबकि लगभग हर घर में स्मार्टफोन पहुंच चुका है। Efiwe इसी वास्तविकता को अवसर में बदल रहा है।

इस प्लेटफॉर्म पर छात्र सीधे अपने स्मार्टफोन पर असली कोड लिख सकते हैं, प्रोग्रामिंग की चुनौतियों को हल कर सकते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – AI से व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। शुरुआती संसाधन लोड होने के बाद यह बिना लगातार इंटरनेट के भी काम करता है।

एक ही डिवाइस पर 20 छात्रों की अलग-अलग प्रोफाइल बनाई जा सकती है, जिससे साझा फोन पर भी पढ़ाई संभव हो पाती है।

कंपनी के अनुसार यह मॉडल निजी और सरकारी, दोनों तरह के स्कूलों के लिए कारगर है। जिन स्कूलों में कंप्यूटर लैब है, वहां यह कक्षा के बाहर निरंतर अभ्यास का मौका देता है, तो वहीं संसाधन-विहीन स्कूल बिना महंगी लैब का इंतजार किए कोडिंग शिक्षा शुरू कर सकते हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति – NEP 2020 के व्यावहारिक शिक्षा के विजन के अनुरूप है।

Efiwe की सबसे बड़ी विशेषता इसका मूल्यांकन मॉडल है। यहां सिर्फ कोर्स पूरा करना काफी नहीं है। छात्रों को खुद एक कैपस्टोन प्रोजेक्ट बनाना होता है। बाहरी स्रोतों से कोड कॉपी-पेस्ट करने पर सख्त रोक है। सफल मूल्यांकन के बाद ही QR कोड से सत्यापित प्रमाणपत्र दिया जाता है।

दुनिया भर में 22 हजार से अधिक छात्रों तक पहुंच बना चुका Efiwe पहले ही Mastercard Foundation EdTech Fellowship, Google for Startups Immersion EMEA और NVIDIA Inception जैसे वैश्विक कार्यक्रमों में अपनी पहचान बना चुका है।

सह-संस्थापक और सीईओ अभिनव नेगी ने कहा, “डिजिटल समावेशन का अर्थ केवल तकनीक तक पहुंच देना नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी क्षमताएं विकसित करने में सक्षम बनाना है। AI के इस दौर में हमारी सफलता का पैमाना यह नहीं होना चाहिए कि हम कितने बच्चों तक पहुंचे, बल्कि यह कि कितने बच्चे स्वयं कोड लिख सकें, प्रोजेक्ट विकसित कर सकें और अपने ज्ञान का उपयोग वास्तविक समस्याओं के समाधान में कर सकें।”

उन्होंने आगे कहा, “हम चाहते हैं कि हर बच्चे को, चाहे वह किसी भी देश, आर्थिक पृष्ठभूमि या विद्यालय से हो, अपना भविष्य स्वयं संवारने के अवसर मिलें।”

भारत और नाइजीरिया में स्वतंत्र रूप से पंजीकृत संयुक्त उद्यम के रूप में संचालित Efiwe अब उत्तराखंड सहित अन्य हिमालयी राज्यों, उत्तर प्रदेश और बिहार में निजी स्कूलों, सरकारी शिक्षा विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।

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