जेनी के आरोपों को हरक सिंह ने बताया भाजपा की साजिश

अंकिता भंडारी प्रकरण से ध्यान भटका रही भाजपा

हरक बोले, करूंगा मानहानि का मुकदमा

छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ अदालत जाने की चेतावनी

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण में शनिवार को उस समय नया राजनीतिक मोड़ आ गया, जब कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने जेनी उर्फ इंदिरा देवरी के गंभीर आरोपों पर मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा।
जेनी द्वारा खुद के साथ दुष्कर्म किए जाने और 23 वर्षीय बेटे के पितृत्व को लेकर सवाल उठाने के बाद हरक सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरे घटनाक्रम को भाजपा की राजनीतिक साजिश करार दिया।

शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में हरक सिंह रावत ने कहा कि जेनी प्रकरण में पहले ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच हो चुकी है। मामले में डीएनए परीक्षण भी कराया गया था और न्यायालय अपना फैसला सुना चुका है। जांच रिपोर्ट को भी न्यायालय का अनुमोदन मिल चुका है। ऐसे में इतने वर्षों बाद फिर से इस मामले को उठाना और न्यायालय के फैसले पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है।
हरक सिंह ने कहा कि 2004 में सीबीआई से क्लीन चिट देने की जानकारी तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी  के प्रदेश के सीएम नारायण दत्त तिवारी को दी थी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी को तत्कालीन जांच या उसके निष्कर्षों पर आपत्ति थी तो उसे उसी समय सामने आना चाहिए था। अब न्यायालय के फैसले के बाद इस तरह की टिप्पणियां करना न्यायालय की अवमानना के समान है।

हरक सिंह ने इस पूरे प्रकरण को अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उनका आरोप था कि अंकिता प्रकरण में उठ रहे सवालों और जनता के दबाव से ध्यान हटाने के लिए भाजपा इस पुराने मामले को दोबारा राजनीतिक मुद्दा बना रही है। उन्होंने इसे भाजपा की बौखलाहट और साजिश बताया।

पूर्व मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि धूमिल करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
हरक सिंह ने कहा कि सीएम धामी ने यह शुरुआत की है। और इस खेल को वो खत्म करेंगे।

क्या है विवाद की नई वजह?

दरअसल, शनिवार को ही जेनी उर्फ इंदिरा देवरी ने देहरादून में पत्रकार वार्ता कर हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका दावा है कि वर्ष 2002 में जब वह 16 वर्ष की थीं, तब उनके साथ दुष्कर्म किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक चिकित्सालय में रखा गया और दबाव बनाकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए।

जेनी ने अपनी पुरानी जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके 23 वर्षीय बेटे का डीएनए परीक्षण नहीं कराया गया। उन्होंने दोबारा सीबीआई जांच, बेटे का डीएनए परीक्षण और हरक सिंह रावत का नार्को टेस्ट कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि बेटे को उसके पिता का नाम और पहचान मिलनी चाहिए।

जेनी ने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को शिकायत पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग भी की है।

इस तरह शनिवार को दोनों पक्षों के सामने आने के बाद 23 साल पुराना जेनी प्रकरण एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत के केंद्र में आ गया है। एक ओर जेनी पुराने मामले की नए सिरे से जांच और डीएनए परीक्षण की मांग कर रही हैं, वहीं हरक सिंह रावत इसे न्यायालय से निस्तारित मामला बताते हुए राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। अब पुलिस की कार्रवाई और जांच को लेकर सरकार का रुख इस विवाद की अगली दिशा तय करेगा।

जेनी की शिकायत पर जांच आरंभ

देहरादून। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर वर्ष 2003 में दुष्कर्म करने का आरोप लगाने वाली इंदिरा डेंजी उर्फ जैनी ने अब पुलिस मुख्यालय को प्रार्थना पत्र भेजकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि घटना के समय हरक सिंह रावत ने अपनी राजनीतिक पहुंच और सत्ता में प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले में कार्रवाई नहीं होने दी। जैनी ने अपने 23 वर्षीय बेटे की पहचान का सवाल उठाते हुए उसका डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी की है।

देहरादून पुलिस को 7 नवंबर को पुलिस मुख्यालय के माध्यम से जैनी का प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ। इसमें उन्होंने वर्ष 2003 में कथित दुष्कर्म की घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि इस घटना के परिणामस्वरूप उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया था। उनका कहना है कि आज 23 वर्ष का हो चुका उनका बेटा अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है।

डीजीपी को जांच प्रार्थना पत्र सौंपते हुए

प्रार्थना पत्र में जैनी ने पूरे मामले की जांच कराने, बेटे का डीएनए टेस्ट करवाने और वर्ष 2003 की कथित घटना में विधिसम्मत कार्रवाई करने की मांग की है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने महिला अधिकारी एवं क्षेत्राधिकारी डोईवाला वंदना वर्मा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल, पुलिस ने शिकायत मिलने और जांच के निर्देश दिए जाने की पुष्टि की है। आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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