अविकल उत्त्तराखण्ड
देहरादून। एक बार फिर चमोली आपदा के अपडेट दे रहे हैं। संवेदनशील हिमालय के नंदादेवी बायोस्फीयर में आये कुदरती कहर ने लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में तबाही मचायी। चिपको आंदोलन की गौरादेवी का रैंणी गांव इलाके में आई आपदा ने लोगों को सम्भलने का मौका ही नही दिया। घाटी में मलबे के ढेर लगा है। और कई जानें लापता हैं।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रविवार सांय की सूचना के मुताबिक चमोली जिले के जोशीमठ-तपोवन में आई आपदा में 170 लोग लापता हैं। ऋषिगंगा प्रोजेक्ट के 22 व NTPC पावर प्रोजेक्ट के 148 कर्मी लापता हैं। रैंणी व मुरांडा गांव कभी पांच लोग लापता हैं। 180 भेड़ बकरियां भी सैलाब में बह गई। मृतकों को राज्य व केंद्र सरकार की ओर से 6-6लाख की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।

सात शव बरामद। 6 लोग घायल।विष्णुप्रयाग पुल समेत 6 पुल टूटे। पुल टूटने से गांवों के बीच संपर्क टूट गया है। main tunnel में 30 मजदूर फंसे। जबकि edit tunnel से 12 मजदूर निकाले गए। फंसे मजदूरों की संख्या ज्यादा हो सकती है। बचाव दल व चिकित्सा टीम मौके पर। रविवार की रात जॉलीग्रांट में सुपर हरक्युलिस aircraft बचाव टीम व अन्य उपकरण लेकर पहुंच गया था।

गौरतलब है कि रविवार की सुबह लगभग 10 बजे जोशीमठ-तपोवन मार्ग पर नंदादेवी ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने के बाद ऋषिगंगा व धौलीगंगा में हाहाकारी बाढ़ आ गयी थी। पावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। और करीब 200 लोगों के मरने की भी आशंका जताई जा रही है। रविवार को ही सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रभावित इलाके का दौरा किया। उन्होंने कहा कि सरकार बचाव व राहत कार्य पर फोकस लेकर काम कर रही है।

सोमवार को फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम जारी रहेगा। SDRF, NDRF, आर्मी,ITBP व पुलिस के जवान फंसे लोगों को निकालने व राहत कार्य में जुटेंगे।

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