मुख्यमंत्री महिला सतत् आजीविका योजना पर एनजीओ की ‘कुंडली’

..न गाय मिली और न ही मधुमक्खी!

प्रशिक्षण के बाद भी महिलाओं को नहीं मिली परिसम्पत्ति

देहरादून। राज्य की महिलाओं को सशक्त स्वरोजगार देने की दिशा में कार्य कर रही सरकार की योजना पर एनजीओ की मनमानी से पलीता लगता नजर आ रहा है।

सम्बंधित विभाग ने जून 2025 में NGO को नोटिस भी जारी किया था । लेकिन एनजीओ ने चुप्पी साधे रखी।
दसौनी ने साक्ष्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस के समक्ष बात रखते हुए कहा कि मामला दून के रायपुर और मालदेवता क्षेत्र का है ।

मामला दून जिले के रायपुर ब्लाक का है, जहां लाभार्थी महिलाओं को मुख्यमंत्री सतत आजीविका योजना के तहत 50 हजार रुपए तक का अनुदान दिया जाना है।

महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए शुरू की गई इस योजना में ट्रेनिंग देने के कई साल बाद भी लाभार्थियों को 50 हजार रुपए अनुदान अभी तक नहीं मिल पाया है।

यही कारण है कि गत तीन वर्षों से पात्र महिलाएं अनुदान के लिए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग व संबंधित एनजीओ के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। जबकि, विभाग का कहना है कि पैसा एनजीओ को दे दिया गया है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि एनजीओ की दादागिरीके आगे विभाग भी नतमस्तक है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अनुदान का लाखों रुपए गया कहां?जबकि विभाग द्वारा एनजीओ को भी नोटिस जारी किया गया। एनजीओ की हठधर्मिता की हद है कि नोटिस मिलने के बाद भी मामला वहीं का वहीं अटका हुआ है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अब जबकि महिलाओं को अभी तक परिसम्पत्ति नहीं दी गयी, ऐसे में सवाल यह लाजिमी है कि 1.26 करोड़ रूपये क्या संस्था विभाग को ब्याज सहित वापस करेगी।

दून शहर से लगे रायपुर ब्लॉक के बजेत, सिरकी, रामनगर डांडा, मीडावाला, दुधियावाला व डांडी क्षेत्रों में करीब 300 महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी गई. जिनका अनुदान करीब 1.26 करोड़ रुपए बैठता है, यह तो एक ब्लाक के कुछ गावों का मामला है ।
यह पैसा देहरादून की संस्था को दिया गया लेकिन संस्था ने अभी तक लाभार्थियों को सामग्री वितरण नहीं की, जबकि विभाग ने महिलाओं को प्रशिक्षण के लिये मार्च 2022 में रु. 3,84,120.00 दिये, जो संस्था के पीएनबी ईसी रोड़ खाते और प्रशिक्षण के बाद परिसंपित्त वितरण के लिये भी एक करोड़ 26 लाख रूपया इसी खाते में गया।
अब जिसका नोटिस विभाग द्वारा जून 2025 में भेजा गया है। सूत्र बताते हैं कि इस संस्था का मददगार एक अधिकारी है।
विभाग से मिली आरटीआई के जवाब में यह निकल कर आयी कि विभाग के साथ हुए इस योजना के अनुबंध में नियमानुसार संस्था के अध्यक्ष या सचिव के ही हस्ताक्षर होने चाहिये, लेकिन यहां संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर के द्वारा अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गये।
अगर सही तरीके से जांच की जाय तो इस संस्था के बैंक खाते में भी झोल है, दूसरी तरफ विभाग ने नोटिस जारी करके अपना पल्ला झाड लिया।
ख़ास बात यह है कि योजना के तहत दून के रायपुर और मालदेवता आदि क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार तहत डेयरी व मधुमक्खी पालन कराया जाना था, इसके लिए सरकार की ओर से चयनित एनजीओ को काम सौंपा गया था।
इसके तहत एनजीओ ने वर्ष 2022 में चयनित महिला पात्रों को ट्रेनिंग भी दी, इसके बाद मालदेवता क्षेत्र में डेयरी पालन के लिए 100 महिलाओं और थानों क्षेत्र की 200 महिलाओं से मधुमक्खी पालन कराया जाना था. लेकिन, ट्रेनिंग के 3 साल बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई l

25-25 महिलाओं का बनाया गया था समूह

योजना के मुताबिक ट्रेनिंग के लिए एनजीओ की ओर से 25-25 महिलाओं का समूह बनाकर 2022 में एक सप्ताह से लेकर एक महीने तक की ट्रेनिंग दी गई. लेकिन, अभी तक गाय खरीदने के लिए धनराशि नहीं मिल पाई. ऐसे में अब कई लाभार्थी आरोप लगा रही हैं कि या तो विभागीय अधिकारी झूठ बोल रहे हैं या फिर एनजीओ गोलमाल कर रहा है। बावजूद इसके अभी भी लाभार्थी धनराशि मिलने को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं l
वहीं उत्तराखंड मुख्यमंत्री महिला सतत् आजीविका योजना के तहत इस संस्था के साथ साथ अन्य 9 एनजीओ को 22 अप्रैल 2025 को राज्य परियोजना अधिकारी मोहित चौधरी की ओर पत्र जारी किया गया. जिसमें लाभार्थियों को दिए जाने वाले अनुदान के बावत स्थलीय जांच निरीक्षण रिपोर्ट मांगी गयी थी l

संस्था ने यह परिसम्पत्ति करनी थी वितरित

-बी कीपिग (मधुमक्खी पालन)

03 बी बॉक्स बी काॕलनी के साथ, हनी हार्वेस्टिंग सेफॕटी किट (बी वाॕल, सेफ्टी ग्लाब्स, ब्रश), वैक्स शीट, 03 बी बाॕक्स आदि

-डेयरी मैनेजमेंट

01 क्राॕस ब्रीड गाय ( जर्सी/क्राॕस ब्रीड), गाय हालिस्टन फिजन,वैप कटर, फीडिंड टब, पशुचारा आदि

ट्रेनिंग हुई, कुछ नहीं मिला

वहीं एनजीओ की ओर से क्षेत्र की महिलाओं को मार्च 2022 में ट्रेनिंग दी गई, लेकिन आज तक न तो गाय दी गई और न ही मधुमक्खी पालन ही शुरू कराया गया है।

पैसा उपलब्ध कराया जाता, तो लाभार्थी खुद ही पशु खरीद लेती। यदि योजना का तीन-तीन चार-चार साल बाद भी लाभ न मिले, तो उसका औचित्य क्या है।
कई महिलाओं ने अनुदान के चक्कर में गाय नहीं खरीदी। बैजत, मालदेवता, अस्थल, शेरकी, रामनगर डांडा आदि अन्य गांवों की महिलाओं का कहना है कि सरकार गंभीरता से योजनाओं का संचालन करे।
वहीं लाभर्थियों को अनुदान के बदले विभाग की ओर से गाय व मधुमक्खी खरीदने की बात भी सामने आ रही है। किस नस्ल की गाय दी जाएगी इसका भी लाभार्थियों को ट्रेनिंग के दौरान कोई जानकारी नहीं दी गई है।

योजना की पात्रता व लाभ

-लाभार्थी निराश्रित, विधवा व निर्बल वर्ग से होनी चाहिये
– महिला की उम्र 18 वर्ष से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए.
– उत्तराखंड राज्य की मूल निवासी होनी चाहिए.
-लाभार्थी किसी अन्य योजना से सामान व्यवसाय से लाभान्वित नहीं होनी चाहिए.
– पात्र महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
– चयनित महिलाओं को ट्रेनिंग अवधि के दौरान 1000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी.
– ट्रेनिंग पूरी होने के बाद लाभार्थियों को 50 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।

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