डीएम बोले- धर्म की आड़ में अराजकता नहीं होगी बर्दाश्त
अविकल उत्तराखंड
रुद्रप्रयाग। महर्षि अगस्त्य मुनि महाराज की ऐतिहासिक एवं पारंपरिक देवरा यात्रा के दौरान अराजकता फैलाने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की हिंसा, अव्यवस्था अथवा कानून हाथ में लेने की कोशिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देवरा यात्रा के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून व्यवस्था बाधित करने के आरोप में 52 व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि अगस्त्यमुनि नगर में आयोजित देवरा यात्रा के शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं पारंपरिक संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा पूर्व से ही सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। महर्षि अगस्त्य मंदिर से अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल तक डोली को पारंपरिक मार्ग से ले जाने के लिए समय रहते सभी प्रबंध पूरे कर लिए गए थे। मंदिर समिति के पदाधिकारियों से भी मार्ग को लेकर पूर्व में सहमति बन चुकी थी। बावजूद कुछ अराजक तत्वों द्वारा धार्मिक परंपरा की आड़ लेकर जानबूझकर अव्यवस्था उत्पन्न करने का प्रयास किया गया। इन लोगों ने डोली को जबरन क्रीड़ा भवन अगस्त्यमुनि के मुख्य द्वार से ले जाने का दबाव बनाया और इसी दौरान क्रीड़ा भवन का मुख्य गेट तोड़ दिया गया। इस घटना से न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, बल्कि नेशनल हाईवे-107 पर करीब तीन से चार घंटे तक यातायात बाधित रहा, जिससे स्थानीय लोगों, यात्रियों और पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
घटना के बाद जिलाधिकारी ने सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं पुलिस प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच के बाद त्रिभुवन चौहान, अनिल बैजवाल, राजेश बैजवाल सहित कुल 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही लोक संपत्ति को नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 के तहत क्षतिपूर्ति की रिकवरी भी की जाएगी। जिलाधिकारी ने कुछ रिपेटिटिव ऑफेंडर्स के खिलाफ गुंडा एक्ट सहित अन्य सख्त धाराओं में कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।

