अविकल उत्तराखंड
नरेन्द्रनगर। बसंत पंचमी को भारतीय ज्ञान परंपरा में केवल ऋतु परिवर्तन का सूचक नहीं बल्कि विद्या, कला, वाग्मिता और अध्यात्म जागरण का प्रतीक माना गया है इसी महत्व के कारण इस अवसर पर सभी कलाओं की जननी ज्ञान की देवी सरस्वती माता के पूजा का विधान भारतीय ज्ञान परंपरा का गौरवशाली इतिहास है।
ज्ञान परंपरा की आराधना और महत्व को ध्यान में रखते हुए धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर स्टाफ क्लब के सौजन्य से वसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती के साथ शास्त्र एवं संगीत वाद्य यंत्रों की पंचांग पूजा भोग के साथ की गई।
बताते चले कि वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर स्टाफ क्लब ने माता सरस्वती की पूजा रूसा सभागार में शास्त्रीय विधि से आयोजित की। इस पूजा में मुख्य यजमान की भूमिका में स्टाफ क्लब संरक्षिका एवं प्राचार्य प्रोफेसर प्रणिता नंद ने निभाई। अनुष्ठान की बात अपने संबोधन में प्राचार्य ने इस अवसर को अक्षर ज्ञान आरंभ का दिन बताया तथा समस्त गुरुओं को याद किया।

इस अवसर पर पूजा मंडप को धूप, दीप नैवेद्य, मिष्ठान, ऋतु फलों, धार्मिक पुस्तकों एवं संगीत वाद्य यंत्रों से सजाया गया।
कॉलेज कार्मिकों ने पीले वस्त्र धारण कर पूजा अनुष्ठान को एक समारोह में बदल दिया। इस अवसर पर मां सरस्वती की पूजा के लिए विशेष रूप से केसर एवं मेवा युक्त मीठे भात का भोग लगाया गया। पूजा अनुष्ठान के बाद स्टाफ क्लब सदस्यों ने कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें कॉलेज कार्मिकों ने अपनी रचनाधर्मिता को खुलकर व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी कार्मिकों एवं छात्रों ने भोग एवं प्रसाद ग्रहण कर बसंत पंचमी की एक दूसरे को शुभकामनाएं दी। यह पहला मौका है जब महाविद्यालय में सरस्वती पूजन का शानदार आयोजन किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन, संपादन एवं प्रबंधन में स्टाफ क्लब अध्यक्ष डॉ संजय महर पदाधिकारी डॉ सुशील कुमार कगडियाल,डॉ विक्रम सिंह बर्त्वाल, डॉ देवेंद्र कुमार, डॉ मनोज फ़ोंदणी, डॉ जितेंद्र नौटियाल, गणेश चंद्र पांडे, रंजना जोशी,गिरीश जोशी, मुनेंद्र कश्यप,रमेश पुंडीर, अनूप नेगी, भूपेंद्र खाती, शीशपाल भंडारी, संजीव कश्यप, अजय पुंडीर आदि समस्त स्टाफ क्लब सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

