बाल बचत योजना के माध्यम से बच्चों को दिया सन्देश

डी.ई.आई. बोर्ड स्कूल्स व राधास्वामी अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का 47वाँ संयुक्त वार्षिक समारोह आयोजित

अविकल उत्तराखंड

दयालबाग। परम पूज्य गुरुमहाराज प्रो. प्रेम सरन सतसंगी एवं परम आदरणीय रानी साहिबा की उपस्थिति में पंजाबी फार्म में डी.ई.आई. बोर्ड स्कूल्स एवं दि राधास्वामी अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की बाल बचत योजना का 47वाँ संयुक्त वार्षिक समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम खेतों में आलू के पत्ते काटने एवं आलू निकालने के कार्य के दौरान संपन्न हुआ, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में दयाल अनुपमा न्यारी व निमित्त गुप्ता ने गुरुमहाराज को गुलाब की कली एवं कार्यक्रम कार्ड भेंट किया, जबकि नव्या एवं कीर्ति पचौरी ने रानी साहिबा को गुलाब की कली एवं कार्यक्रम कार्ड प्रदान किया। कार्यक्रम की शुरुआत दयाल सद कृपाल प्रार्थना से हुई। इसके बाद डी.ई.आई. बोर्ड स्कूल्स के बच्चों ने “सरन गुरु आया” पर नृत्य प्रस्तुति दी, जबकि बाल बचत योजना के बच्चों ने “गुरु की कर हर दम पूजा” शब्द पाठ पर भांगड़ा नृत्य प्रस्तुत किया।

दि राधास्वामी अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष गुर सरूप सूद (भूतपूर्व आईएएस) ने बाल बचत योजना की प्रगति और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह योजना 1 फरवरी 1979 को बसंत पंचमी के अवसर पर प्रारंभ की गई थी, जिसे वर्ष 1989 में संशोधित किया गया। योजना का उद्देश्य बच्चों में बचत की आदत विकसित करना तथा नियमित रूप से बैंक में धनराशि जमा करने के लिए प्रेरित करना है। योजना के अंतर्गत 7 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के खाते खोले जाते हैं। जमा राशि न्यूनतम 50 रुपये एवं अधिकतम 200 रुपये निर्धारित है, जिसे वर्ष में तीन तिमाहियों में जमा किया जाता है।
वर्ष 2025 की अंतिम तिमाही तक इस योजना के अंतर्गत 627 बाल बचत खाते सक्रिय रहे, जिनमें 243 बालक एवं 272 बालिकाओं सहित कुल 515 बच्चों को प्रसाद एवं पुरस्कार के लिए आमंत्रित किया गया। इसके अतिरिक्त 37 बच्चों को केवल प्रसाद के लिए आमंत्रित किया गया।

कार्यक्रम का समापन “तमन्ना यही है” प्रार्थना के साथ हुआ। इस दौरान बच्चों को प्रसाद एवं नाश्ता वितरित किया गया तथा नियमित बचत करने वाले बच्चों को पुरस्कार स्वरूप बैग प्रदान किए गए। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण ई-सतसंग केसकेड के माध्यम से देश-विदेश के 580 से अधिक केंद्रों एवं शाखाओं में किया गया।

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