भारतीय नौसेना की शक्ति की झलक
अविकल उत्तराखंड
विशाखापत्तनम/ देहरादून। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के तत्वावधान में उत्तराखंड से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने विशाखापत्तनम स्थित ऐतिहासिक टीयू-142 विमान संग्रहालय का भ्रमण किया।
इस दौरान पत्रकारों ने भारतीय नौसेना की गौरवशाली विरासत और समुद्री सुरक्षा में टीयू-142 विमान की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण के दौरान संग्रहालय के अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि टीयू-142 विमान भारतीय नौसेना में लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए उपयोग में लाया जाता था।

यह विमान अपनी उत्कृष्ट तकनीक, लंबी उड़ान क्षमता और रणनीतिक महत्व के कारण भारतीय नौसेना की शक्ति का प्रतीक रहा है। वर्ष 2017 में सेवा से निवृत्त होने के बाद इसे संग्रहालय के रूप में स्थापित किया गया, ताकि आमजन और युवाओं को नौसेना के इतिहास से परिचित कराया जा सके।
पत्रकारों ने विमान के अंदरूनी हिस्सों का अवलोकन किया और उसके संचालन तंत्र, उपकरणों और मिशन क्षमताओं के बारे में जानकारी ली।
प्रतिनिधिमंडल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों के योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
पीआईबी अधिकारियों ने बताया कि इस भ्रमण का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के पत्रकारों को देश की सामरिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना तथा सकारात्मक संवाद को प्रोत्साहित करना है।

ऐतिहासिक पनडुब्बी आईएनएस कुरसुरा (एस20) का अवलोकन किया
प्रतिनिधिमंडल ने विशाखापत्तनम पहुंचते ही 1971 के भारत–पाक युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाली ऐतिहासिक पनडुब्बी आईएनएस कुरसुरा (एस20) का भ्रमण किया। यह वही युद्धपोत है जिसने बंगाल की खाड़ी में सक्रिय रहते हुए पाकिस्तानी नौसेना के खिलाफ निर्णायक अभियानों में हिस्सा लिया और दुश्मन के दाँत खट्टे कर दिए थे।
नव सेना के आडनरी सब लेफ्टिनेंट अनिल करने चौधरी ने पत्रकारों को पनडुब्बी के भीतर ले जाकर इसके विभिन्न हिस्सों की जानकारी दी। गाइड एवं सेवानिवृत्त नौसैनिक अनिल ने इसके संचालन, रणनीति और तकनीकी क्षमताओं के बारे में विस्तार से बताया। भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने टॉरपीडो कक्ष, कमांड रूम, क्रू क्वार्टर, इंजन रूम देखा।
उन्होंने बताया कि 1971 के युद्ध के दौरान कुरसुरा ने बंगाल की खाड़ी में गुप्त रूप से गश्त लगाते हुए पाकिस्तानी नौसैनिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी और कई रणनीतिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पनडुब्बी से संग्रहालय तक का सफ़र करीब तीन दशकों तक भारतीय नौसेना की सेवा करने के बाद 1999 में आईएनएस कुरसुरा को सेवा से मुक्त कर दिया गया।

2001 में इसे विशाखापत्तनम के रामकृष्णा बीच पर संग्रहालय के रूप में स्थापित किया गया। आज यह देश की सैन्य धरोहर का प्रतीक बन चुकी है और विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं व आम नागरिकों के लिए प्रेरणा का केंद्र है।
पीआईबी के सहायक निदेशक संजीव सुंदरियाल ने बताया कि अगले दिनों में वे विशाखापत्तनम और आसपास के अन्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक स्थलों का दौरा करेंगे ।

