भूमि हस्तांतरण का विरोध, विभिन्न मुद्दों पर आंदोलन तेज

पावर सेक्टर से जुड़े फैसलों और लंबित मांगों को लेकर आक्रोश

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। प्रदेश में पावर सेक्टर से जुड़े विभिन्न निर्णयों और लंबित मांगों को लेकर अभियंताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। एक ओर जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि निजी क्षेत्र को हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पदोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन जारी है।

जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि निजी क्षेत्र को देने के प्रस्ताव का विरोध

पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमि को यूआईआईडीबी (UIIDB) के माध्यम से निजी क्षेत्र को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर निर्णय को प्रदेश एवं पावर सेक्टर के हितों के विरुद्ध बताया है।

पत्र में कहा गया है कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की डाकपत्थर एवं ढालीपुर स्थित विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित कुल 76.7348 हेक्टेयर भूमि को शासनादेश दिनांक 03 दिसंबर 2025 के माध्यम से UIIDB को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिला प्रशासन को भूमि का दाखिल-खारिज, सीमांकन एवं अधिग्रहण की कार्यवाही करने के आदेश भी जारी किए गए हैं, जिससे पावर सेक्टर में गहरी चिंता व्याप्त है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह भूमि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से जल विद्युत परियोजनाओं के वर्तमान संचालन एवं भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए आवंटित की गई थी। डाकपत्थर क्षेत्र से यमुना स्टेज-1 एवं स्टेज-2, व्यासी परियोजना, लखवाड़, किशाऊ, टौंस सहित कई महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं का संचालन एवं निर्माण किया जा रहा है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना लगभग असंभव बताया गया है।
फेडरेशन ने कहा कि भूमि हस्तांतरण से प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी। साथ ही भारत सरकार की यमुना पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत लखवाड़ एवं किशाऊ जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पत्र के माध्यम से भूमि हस्तांतरण आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि पावर सेक्टर की भूमि को एकतरफा तरीके से निजी क्षेत्र को सौंपने का प्रयास किया गया तो देशभर के बिजली कर्मी एवं इंजीनियर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

पावर इंजीनियर्स का आंदोलन जारी

यूपीसीएल मुख्यालय में दूसरे दिन विरोध सभा आयोजित
उत्तरांचल पॉवर इंजीनियर्स एसोसिएशन द्वारा अधिशासी अभियंता के 40 रिक्त पदों पर पदोन्नति न किए जाने तथा अन्य लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर यूपीसीएल मुख्यालय में चरणबद्ध आंदोलन के तहत दूसरे दिन विरोध सभा आयोजित की गई।

सभा की अध्यक्षता अधीक्षण अभियंता मनदीप सिंह राणा ने की। महासचिव राहुल चानना ने कहा कि न्यायालय के आदेशानुसार जारी वरिष्ठता सूची पर कोई स्थगन आदेश नहीं है। पदोन्नत सहायक अभियंताओं द्वारा दायर अवमानना याचिका भी 03 जनवरी 2026 को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी है। प्रबंधन ने वार्ता के दौरान याचिका खारिज होने के बाद शीघ्र पदोन्नति का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

वक्ताओं ने कहा कि निगम में अधिशासी अभियंता के 93 स्वीकृत पदों में से 40 से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे कई अभियंताओं को दोहरा कार्यभार संभालना पड़ रहा है। अभियंताओं की कमी के कारण जनता को मिलने वाली सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि नवनियुक्त सहायक अभियंताओं को विभागीय संयोजन, प्रारंभिक इंक्रीमेंट और स्थायीकरण जैसे मामलों में भी प्रबंधन द्वारा कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।

एसोसिएशन अध्यक्ष युद्धवीर सिंह तोमर ने कहा कि अंतिम वरिष्ठता सूची जारी होने तथा पात्रता प्राप्त होने के बावजूद सीधी भर्ती के सहायक अभियंता पिछले 16 वर्षों से अपनी पहली पदोन्नति से वंचित हैं, जिससे अभियंताओं में भारी रोष है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अधिशासी अभियंता के रिक्त पदों पर पदोन्नति तथा अन्य लंबित मांगों के निराकरण तक आंदोलन जारी रहेगा। मांगें पूरी न होने की स्थिति में 11 फरवरी 2026 को यूपीसीएल मुख्यालय में विरोध सभा जारी रखी जाएगी।

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