उत्तराखंड में 98 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल से जल

संसद में उठी पहाड़ी जिलों में जल संकट का मुद्दा

अविकल उत्तराखंड

देहरादून/नई दिल्ली। जल जीवन मिशन के तहत उत्तराखंड ने ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल पहुंचाने के लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

राज्य में लगभग 98 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल जल कनेक्शन पहुंच चुका है। हालांकि पर्वतीय और आपदा-प्रवण क्षेत्रों में मौसमी जल संकट, जल स्रोतों के क्षरण और पाइपलाइन क्षति जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। इन मुद्दों को लेकर हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संसद में प्रश्न उठाया।

सांसद रावत ने जल शक्ति मंत्रालय से पूछा कि जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के बावजूद पहाड़ी जिलों में जल स्रोतों के सूखने, भूस्खलन से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और जल गुणवत्ता संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमण्णा ने 11 फरवरी 2026 तक के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि उत्तराखंड में कुल 14,48,343 ग्रामीण परिवारों में से 14,18,272 परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। इससे राज्य में 97.92 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित हुई है, जो मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।

हरिद्वार जनपद में भी प्रगति उल्लेखनीय रही है। जिले के 2,49,303 ग्रामीण परिवारों में से 2,40,751 परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है, जिससे 96.57 प्रतिशत कवरेज दर्ज की गई है।

राज्य मंत्री ने कहा कि हरिद्वार सहित पूरे राज्य में शत-प्रतिशत और सतत जलापूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तराखंड की प्रयोगशालाओं में 80,856 नमूनों का रासायनिक परीक्षण और 89,187 नमूनों का जीवाणु परीक्षण किया गया। इनमें हरिद्वार जनपद में 3,309 रासायनिक तथा 3,779 जीवाणु परीक्षण शामिल हैं।

सांसद रावत ने कहा कि उत्तराखंड की संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी को देखते हुए गुरुत्वाकर्षण आधारित जल योजनाएं, वर्षा जल संचयन, स्रोत संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, डिजिटल मॉनिटरिंग तथा आपदा प्रबंधन के लिए फ्लेक्सी-फंड जैसे प्रावधानों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कनेक्शन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल स्रोतों की दीर्घकालिक सततता और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप मजबूत अवसंरचना विकसित करना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ा विषय है और लक्ष्य पहाड़ के अंतिम घर तक स्वच्छ, सुरक्षित और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
सांसद ने जल शक्ति मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए वित्तीय और तकनीकी सहयोग देने के लिए आभार व्यक्त किया और राज्य के हितों की पैरवी जारी रखने की बात कही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *