युवा वर्ग, कुपोषण और सघन स्क्रीनिंग पर विशेष जोर

दून मेडिकल कॉलेज में टीबी उन्मूलन पर समीक्षा बैठक

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय में क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक भारत सरकार के नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने की, जिसमें नेशनल एवं स्टेट टास्क फोर्स के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।

प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने युवा वर्ग में टीबी के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पोषण से जुड़ी गंभीर चुनौती भी है। उन्होंने कहा कि कुपोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि पोषण परामर्श और पोषण सहायता को टीबी उपचार का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए तथा कोई भी मरीज जांच और उपचार से वंचित न रहे।

नेशनल टीबी टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. अशोक भारद्वाज ने कहा कि टीबी की रोकथाम के बिना इसके उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए सक्रिय केस खोज, संपर्कों की नियमित स्क्रीनिंग और निवारक उपचार आवश्यक हैं। उन्होंने सामुदायिक सहभागिता, डिजिटल मॉनिटरिंग और उपचार के बेहतर अनुपालन पर भी जोर दिया।

स्टेट टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा कि प्रमुख लक्षणों और उच्च जोखिम श्रेणियों की व्यवस्थित स्क्रीनिंग को ओपीडी और आईपीडी दोनों स्तरों पर सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, बलगम में खून, लगातार बुखार, वजन में कमी, भूख कम लगना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही एचआईवी संक्रमित, मधुमेह रोगी, कुपोषित व्यक्ति, पूर्व टीबी रोगी और टीबी मरीज के निकट संपर्क में रहने वाले लोगों की नियमित जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बैठक में यूनिवर्सल ड्रग सेंसिटिविटी टेस्टिंग लागू करने, ओपीडी और आईपीडी में अनिवार्य लक्षण आधारित स्क्रीनिंग करने, सक्रिय केस खोज अभियान को मजबूत बनाने तथा मरीजों के निकट संपर्कों की जांच और निवारक उपचार सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही कुपोषित मरीजों को पोषण सहायता योजनाओं से जोड़ने और डिजिटल माध्यम से उपचार की नियमित निगरानी करने पर भी जोर दिया गया।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने टीबी की प्रारंभिक पहचान बढ़ाने, संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने, मृत्यु दर कम करने और उपचार सफलता दर में वृद्धि के लिए समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कार्य करने का संकल्प दोहराया। संस्थान ने टीबी मुक्त समाज के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

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