बजट सत्र- गैरसैंण में गूंजा चर्चित स्मार्ट मीटर का मुद्दा

स्मार्ट मीटर योजना पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने बताया ‘बड़ा घोटाला’

सरकारी निगमों को कमजोर कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप, जनता पर जबरन थोपने का भी दावा

अविकल उत्तराखण्ड

गैरसैंण। राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को लेकर विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस के विधायक विक्रम सिंह नेगी, सुमित ह्रदयेश, अनुपमा रावत व रवि बहादुर ने स्मार्ट मीटर में बड़े घपले की आशंका जताई।

विपक्षी विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर, प्रीपेड मीटर और बिजली व्यवस्था में किए जा रहे बदलाव किसी तकनीकी सुधार का हिस्सा नहीं बल्कि एक बड़े आर्थिक खेल का हिस्सा हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार सुनियोजित तरीके से सरकारी बिजली निगमों को कमजोर कर रही है ताकि भविष्य में बिजली वितरण क्षेत्र को निजी कंपनियों को सौंपा जा सके।

विधायकों ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जनता की सहमति के बिना जबरन लागू की जा रही है। उन्होंने इसे “बहुत बड़ा घोटाला” बताते हुए कहा कि मीटर बदलने का असली उद्देश्य बिजली क्षेत्र के संभावित निजीकरण से पहले कंपनियों द्वारा सर्वे करना है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि भविष्य में यह क्षेत्र उनके लिए कितना लाभदायक साबित होगा।

उन्होंने कहा कि देशभर में लागू की जा रही यह योजना केंद्र सरकार की रिफॉर्म बेस्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत संचालित है, जिसके तहत करोड़ों स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस परियोजना के बड़े ठेके कुछ चुनिंदा कंपनियों को दिए गए हैं और इसके माध्यम से बिजली क्षेत्र में एक तरह की ‘मोनोपोली’ स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

विधायको ने सदन में कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में बिजली आपूर्ति के लिए मीटर होना अनिवार्य जरूर बताया गया है, लेकिन कहीं भी यह नहीं लिखा है कि केवल स्मार्ट मीटर ही अनिवार्य होंगे। इसके बावजूद पुराने मीटरों को जबरन हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह लोगों के घरों में सुबह-शाम छापेमारी जैसी कार्रवाई कर मीटर बदले जा रहे हैं और विरोध करने वालों पर जुर्माना तक लगाया जा रहा है।

विधायक रवि बहादुर ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक उपभोक्ता पंकज का बिजली बिल बकाया होने पर उसका पुराना मीटर हटा दिया गया और बिजली काट दी गई। बाद में जब उसने किसी तरह पैसे की व्यवस्था की तो उससे कहा गया कि अब केवल स्मार्ट मीटर ही लगाया जाएगा। विधायक ने इसे जनता के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को इस तरह से दबाव का माध्यम बनाना उचित नहीं है।

विपक्ष ने अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पारदर्शी तथा स्वैच्छिक होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों पर ऊपर से दबाव है, जिसके कारण वे लोगों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

विपक्ष के इस आरोप के बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया। कई सदस्यों ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की और कहा कि यदि योजना जनहित में है तो सरकार को इसके लाभ और प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

कांग्रेस विधायक सुमित ह्रदयेश,अनुपमा रावत व रवि बहादुर

स्मार्ट मीटर योजना क्यों बन रही विवाद का कारण

बिजली क्षेत्र में तकनीकी सुधार के नाम पर स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पूरे देश में तेजी से लागू की जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे बिजली चोरी पर नियंत्रण होगा, बिलिंग में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ताओं को वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी मिलेगी। लेकिन कई राज्यों में इसे लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है।

विरोध का मुख्य कारण यह है कि स्मार्ट मीटर प्रीपेड प्रणाली पर आधारित होते हैं, यानी उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज कर बिजली इस्तेमाल करनी पड़ती है। कई लोगों का मानना है कि इससे बिजली की उपलब्धता पर उपभोक्ता का नियंत्रण कम हो सकता है और बिलिंग का बोझ अचानक बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से आधुनिक जरूर हैं, लेकिन इन्हें लागू करने से पहले उपभोक्ताओं को पूरी जानकारी देना और उनकी सहमति लेना भी उतना ही जरूरी है।

डेटा बॉक्स: स्मार्ट मीटर योजना के प्रमुख आंकड़े

• देशभर में प्रस्तावित स्मार्ट मीटर की संख्या – लगभग **25 करोड़**
• अनुमानित कुल परियोजना लागत – करीब **1.5 लाख करोड़ रुपये**
• योजना का नाम – **रिफॉर्म बेस्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS)**
• उद्देश्य – बिजली वितरण क्षेत्र में सुधार और डिजिटल मीटरिंग
• लागू करने वाली एजेंसियां – राज्य बिजली वितरण कंपनियां

विपक्ष के प्रमुख आरोप

• स्मार्ट मीटर योजना को “बड़ा घोटाला” बताया
• सरकारी बिजली निगमों को कमजोर करने का आरोप
• भविष्य में बिजली वितरण के निजीकरण की आशंका जताई
• कुछ बड़ी कंपनियों को ठेके देने का आरोप
• जनता की सहमति के बिना मीटर बदलने की शिकायत

सरकार और विशेषज्ञ क्या कहते हैं

• स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी कम होगी
• बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनेगी
• उपभोक्ता मोबाइल ऐप से बिजली खपत देख सकेंगे
• बिजली वितरण कंपनियों का वित्तीय घाटा कम होगा
• भविष्य में स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी

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