बॉबी पंवार ने EVM की खोली ‘कलई’
मुख्य निर्वाचन कार्यालय करेगा कार्रवाई
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखण्ड स्वाभिमान मोर्चा के नेता बॉबी पंवार के ईवीएम पर सवाल उठाने पर मुख्य निर्वाचन कार्यालय की ओर से कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है।
गौरतलब है कि बॉबी पंवार ने फेसबुक में मशीन के दुरुपयोग पर आशंका जताई थी।
मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि सोशल मीडिया के फेसबुक एकाउंट https://www.facebook.com/share/v/18K38x6uTZ/ ?mibextid= wwXIfr पर प्रचारित खबर “काले कांच के पीछे की काली सच्चाई” जिसमें तथाकथित रूप से ईवीएम की विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता पर भ्रामक समाचार प्रकाशित कर जन सामान्य को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
उक्त तथाकथित वीडियो में दर्शाई गयी स्क्रीन / ईवीएम नहीं है, यह एक कूटरचित, बनावटी एवं कृत्रिम यंत्र है, जिसका भारत निर्वाचन आयोग की वास्तविक ईवीएम से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कोई मेल नहीं है।
कहा गया कि ईवीएम की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर भारत के विभिन्न माननीय उच्चन्यायलयों सहित भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी अपनी मुहर लगायी गयी है। सुलभ संदर्भ हेतु निम्न प्रकरणों में माननीय न्यायालयों द्वारा पारित निर्णयों का संज्ञान लिया जा सकता है।
(1)- People’s Union for Civil Liberties v. Union of India, (2013) (2)- Subramanian Swamy v- Election Commission of India, (2013), (3)-Reshma Vithalbhai Patel v- Union of India
किसी भी निर्वाचन से पहले प्रत्येक जनपद में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक-एक ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच की जाती है और जांच के दौरान मॉकपोल (दिखावटी मतदान) की प्रक्रिया भी सम्पादित की जाती है। अभी तक किसी भी राजनैतिक दल द्वारा इस सम्बंध में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं की गई।

कैंडिडेट सेटिंग के दौरान भी निर्वाचन लडने वाले अभ्यर्थियों की उपस्थिति में ही प्रत्येक मशीन में मॉक पोल की प्रक्रिया सम्पादित की जाती है। आज तक किसी प्रत्याशी द्वारा कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं की गयी, जिससे स्पष्ट होता है कि ईवीएम पूर्ण रूप से पारदर्शी और विश्वसनीय है।
प्रत्येक मतदेय स्थल पर, वास्तविक मतदान प्रारम्भ होने से 90 मिनट पूर्व प्रत्येक अभ्यर्थी / अभ्यर्थियों के मतदान अभिकर्ता / अभिकर्ताओं (पोलिंग एजेण्टस) की उपस्थिति में भी मॉकपोल की प्रक्रिया सम्पादित की जाती है। इस संदर्भ में वर्ष 2002 से लेकर आज तक किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
यदि किसी मतदाता को ईवीएम में वोट डालते समय वीवीपीएटी स्लिप के संदर्भ में संदेह होता है तो वो निर्वाचनों के संचालन नियम-1961 के नियम-49MA के प्राविधानों के अनुसार वह पीठासीन अधिकारी को उक्त आपत्ति के संबंध में एक लिखित घोषणा प्रस्तुत कर सकता है। आतिथि तक एक भी प्रकरण संज्ञान में नहीं है।
जनहित में यह भी स्पष्ट करना उचित होगा कि, सोशल मीडिया पर प्रचारित उक्त वीडियो में सम्बोधनकर्ता व्यक्ति द्वारा लोक सभा सामान्य निर्वाचन-2024 में स्वयं 01-टिहरी गढ़वाल संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से बतौर प्रत्याशी के रूप में प्रतिभाग किया गया था। उनके द्वारा ऐसा कोई तथ्य संज्ञान में नहीं लाया गया कि, अमुख मतदाता ने जिस अभ्यर्थी को वोट डाला था वीवीपीएटी प्रिन्ट स्लिप में किसी अन्य अभ्यर्थी का नाम और चुनाव चिन्ह प्रिन्ट हुआ हो।
उपरोक्त तथ्यों और प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर ईवीएम के बारे में प्रदर्शित एवं प्रचारित सामग्री पूर्ण रूप से कूटरचित, बनावटी एवं कृत्रिम है। जनसामान्य एवं मतदाताओं को इस प्रकार की भ्रामक सामग्री पर विश्वास न करते हुए, स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया पर अपना विश्वास कायम रखना चाहिए।

