कई दिनों से दाल-चावल से चलाया जा रहा काम
छात्रों के स्वास्थ्य के साथ कोई कोताही नहीं बरती जाएगी-मंत्री
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में शुमार दून मेडिकल कॉलेज की मेस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैस किल्लत के नाम पर पिछले एक माह से छात्रों को गेहूं की रोटी से वंचित रखा जा रहा है, जिससे भोजन असंतुलित हो गया है और कई छात्रों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा है।
कॉलेज के कई छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मेस में अधिकतर दिनों में दोपहर और रात के भोजन में केवल दाल-चावल ही परोसा जा रहा है। रोटी की नियमित अनुपलब्धता के कारण छात्रों का भोजन संतुलित नहीं रह गया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में कई छात्रों का वजन दो से तीन किलो तक घट गया है।
छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस संबंध में कॉलेज प्रशासन को अवगत कराया गया है। लेकिन ठेकेदार द्वारा कोई स्थायी सुधार नहीं किया गया। हाल ही में चीफ वार्डन ने मेस का निरीक्षण कर अव्यवस्था पर ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद एक दिन भोजन व्यवस्था सुधरी, लेकिन जल्द ही फिर स्थिति पहले जैसी हो गई।
इस मामले में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि कॉलेज की मेस ठेके पर संचालित है और ठेकेदार की कार्यप्रणाली तथा भोजन की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी के निर्देश प्राचार्य को दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के स्वास्थ्य और पढ़ाई के साथ किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं करेगी।
गौरतलब है कि दून मेडिकल कॉलेज में छात्रावास में रहने वाले छात्रों के लिए मेस में भोजन करना अनिवार्य है। करीब ढाई से तीन सौ छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने वाली मेस में रोटी की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं एक महत्वपूर्ण पौष्टिक अनाज है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और आवश्यक विटामिन व खनिज तत्व पाए जाते हैं। इसके अभाव में शरीर के वजन, पाचन तंत्र और समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

