करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा
कमीशन के लालच में बिक रहे बैंक खाते, 2200 संदिग्ध अकाउंट एसटीएफ की रडार पर
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखण्ड एसटीएफ ने ऑपरेशन प्रहार के तहत साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य में संचालित म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ ने 15 संदिग्ध म्यूल खातों पर कानूनी कार्रवाई की है, जबकि 80 से अधिक खातों का सत्यापन किया गया है। इस दौरान गिरोह के दो प्रमुख एजेंटों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी भोले-भाले लोगों को कमीशन, नौकरी या किराए का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल करते थे। बाद में इन्हीं खातों का उपयोग ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने में किया जाता था।
एसटीएफ की तकनीकी जांच और बैंक अभिलेखों के विश्लेषण में एक खाते में ही करीब 1.53 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ी 28 शिकायतें सामने आईं, जबकि अन्य खातों में भी लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए। इस मामले में साइबर पुलिस थाना देहरादून में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

अभियान के तहत एसटीएफ की 12 टीमें राज्यभर में म्यूल खातों का सत्यापन कर रही हैं। वर्तमान में करीब 2200 संदिग्ध बैंक खाते एजेंसी की रडार पर हैं। खाताधारकों की पहचान, बैंक रिकॉर्ड की जांच और मोबाइल नंबरों के विश्लेषण का काम लगातार जारी है। कई लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
पुलिस ने इस मामले में दानिश अंसारी और अंकित एन्थोनी को हिरासत में लिया है। उनके पास से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
एसटीएफ ने आमजन से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम या केवाईसी दस्तावेज किसी को न दें। ऐसा करना कानूनी अपराध है। संदिग्ध लेनदेन की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

