बाल संरक्षण आयोग ने पीड़िता के वीडियो बयान पर जताई आपत्ति
देखें, पीड़िता, भाई व अन्य खास वीडियो
पुलिस की ‘साजिश’ थ्योरी ने दुष्कर्म को झुठलाया
कांग्रेस ने सरकार और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
अविकल थपलियाल
देहरादून/चंपावत। चंपावत के चर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण ने अब गंभीर कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है।
शुरुआत में सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण की सनसनीखेज घटना के रूप में सामने आए इस मामले में अब पुलिस की जांच, वायरल वीडियो बयानों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो में पीड़िता और उसके भाई ने घटना और उसके बाद की परिस्थितियों को लेकर अपनी बात रखी। और रेप की घटना से साफ इंकार कर दिया। इन बयानों के बाद मामले ने व्यापक जनचर्चा का रूप ले लिया। और पूरी कहानी की दिशा ही बदल दी।
दूसरी ओर, पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी जांच का हवाला देते हुए पूरे घटनाक्रम को “साजिश” और “बदले की भावना” से जोड़कर देखते हुए बयान जारी किए।
मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार नाबालिग लड़की के साथ अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की घटना का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने पोक्सो सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच के दौरान घटना को गंभीर आपराधिक वारदात मानते हुए कार्रवाई की गई।
हालांकि, बाद में पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे शिकायत की परिस्थितियों और आरोपों पर सवाल खड़े हुए हैं।
पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और पूछताछ के आधार पर मामला कथित तौर पर पूर्व नियोजित साजिश की दिशा में जाता दिखाई दिया।
यहीं से यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। सोशल मीडिया पर एक पक्ष पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे झूठे आरोपों का मामला बता रहा है।
मामले में जिला अस्पताल और सीएमओ स्तर पर मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
हालांकि पूरी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में मेडिकल साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन केवल मेडिकल रिपोर्ट ही अंतिम सत्य नहीं मानी जाती।
पीड़िता का बयान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य तथ्य भी विवेचना का अहम हिस्सा होते हैं।
इधऱ, उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नाबालिग से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए तथा किसी भी निष्कर्ष पर तथ्यों के आधार पर ही पहुंचना चाहिए। उन्होंने पीड़िता के वीडियो बयान जारी करने पर भी नाराजगी जताई।
इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पूरे मामले में सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। गोदियाल ने आरोप लगाया कि जांच की दिशा लगातार बदल रही है और सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि पुलिस अब इसे साजिश बता रही है तो प्रारंभिक स्तर पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आधार भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
कांग्रेस ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए कहा है कि पीड़ित पक्ष के आरोपों, वायरल वीडियो बयानों और पुलिस की बदलती थ्योरी के बीच सच सामने आना जरूरी है।
राजनीतिक रूप से भी यह मामला इसलिए संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि चंपावत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गृह जनपद है। ऐसे में विपक्ष लगातार सरकार को घेरने में जुटा है। विपक्ष ने पहले दिन से ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिये। और अब मामले के “मैनेज” होने की बात कहकर पुलिस-प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया।
इस कथित गैंग रेप प्रकरण में लेन देन की चर्चा भी आम हो गयी है। जबकि पीड़िता के भाई ने अपने वीडियो बयान में किसी भी प्रकार के सौदेबाजी से साफ इंकार किया है।
पीड़िता के पिता को लेकर भी कानाफूसी हो रही है। बुजुर्ग पिता थाने में हुई पूछताछ के बाद किस स्थान पर है। यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस मामले में पुलिस ने पीड़िता के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक आरोपी भाजपा से जुड़ा है।
फिलहाल, चंपावत का यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की विश्वसनीयता, राजनीतिक हस्तक्षेप, सोशल मीडिया ट्रायल और न्याय प्रक्रिया पर गम्भीर बहस का विषय बन चुका है। अब सबकी नजर पुलिस विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इस बहुचर्चित प्रकरण का असली सच क्या था ?
पीड़िता और परिजनों के वीडियो से बदला घटनाक्रम
चंपावत के चर्चित कथित नाबालिग गैंगरेप प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक ओर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पूरे मामले को “साजिश” और “फर्जी आरोप” बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस प्रकरण को लेकर सरकार, पुलिस प्रशासन और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
मामले में पीड़िता और उसके परिजनों के वीडियो सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। पुलिस का दावा है कि मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई तथा पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान भी नहीं मिले। वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि मामले को जल्दबाजी में दबाने का प्रयास किया गया।
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता पिता और पीड़िता को दो दिनों तक पुलिस निगरानी में रखा गया। आरोप लगाए जा रहे हैं कि बिना न्यायिक जांच शुरू किए ही बयान बदलवाने का प्रयास हुआ। विपक्ष का कहना है कि जिस पुलिस ने युवती को कथित रूप से कमरे में बंधी हालत में बरामद किया, अब वही अधिकारी पूरे मामले को झूठा साबित करने में जुटे हैं।
इधर मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) के सार्वजनिक बयान ने भी बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि किसी संवेदनशील मामले में मेडिकल रिपोर्ट को इस तरह सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करना जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े करता है।
पुलिस के अनुसार, मामले में कमल रावत नामक व्यक्ति और उसकी एक महिला मित्र द्वारा कथित साजिश रची गई थी, जिसके तहत तीन युवकों को झूठे केस में फंसाने का प्रयास किया गया। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़िता ने वीडियो में स्वीकार किया है कि उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ।
हालांकि, राजनीतिक दलों और महिला संगठनों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके और किसी निर्दोष को फंसाने या किसी पीड़ित को दबाने—दोनों स्थितियों में न्याय सुनिश्चित हो सके।
क्या बोले पुलिस अधिकारी?
पुलिस का दावा— मेडिकल में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं
पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले
तीन युवकों को फंसाने की साजिश रची गई
कमल रावत और उसकी सहयोगी पर संदेह
विपक्ष ने उठाए सवाल
पिता-पुत्री को दो दिन तक क्यों रखा गया निगरानी में?
न्यायिक जांच तुरंत क्यों नहीं कराई गई?
मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करने की जल्दबाजी क्यों?
क्या मामले को दबाने का प्रयास हुआ?
वीडियो में क्या कहा पीड़िता ने?
- “मेरे साथ कुछ गलत नहीं हुआ”
- “पूरा बयान बिना दबाव के दे रही हूं”
- कमल रावत पर साजिश रचने का आरोप
- भाई ने भी वीडियो जारी कर मांगी माफी
ऐसे बदला पूरा घटनाक्रम
5 मई- पिता ने बेटी के लापता होने और गैंगरेप की शिकायत दी।
6 मई- पुलिस ने तीन आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया।
7 मई- पुलिस ने प्रेसवार्ता कर गैंगरेप से इनकार किया।
8 मई- पीड़िता और उसके भाई के वीडियो सामने आए।

