यूकॉस्ट में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का आयोजन

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड राज्य विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, उत्तराखण्ड जैव विविधता बोर्ड तथा लक्ष्य सोसाइटी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है तथा छोटे-छोटे प्रयास वैश्विक स्तर पर बड़ा प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यूकॉस्ट की “मां धरा नमन” पहल की जानकारी प्रतिभागियों के साथ साझा की। इस अवसर पर यूकॉस्ट के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. आशुतोष मिश्रा ने यूकॉस्ट जैव विविधता पार्क पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि पार्क में 5,000 से अधिक पौधे, 265 से अधिक प्रजातियां तथा 1,000 से अधिक बांस के पौधे संरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि समृद्ध वनस्पति के कारण यह पार्क तितलियों, पक्षियों एवं सर्पों एवं कई जीव जंतुओं के लिए प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित हुआ है और जैव विविधता संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। पद्मश्री एवं मैती आंदोलन के संस्थापक कल्याण सिंह रावत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग के कारण क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता खतरे में है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान एवं पारिस्थितिकीय प्रणालियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि कर्नल प्रतुल थपलियाल, टेरिटोरियल आर्मी ने पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के लिए इको टास्क फोर्स द्वारा संचालित विभिन्न हरित अभियानों की जानकारी दी। यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी.पी. उनियाल ने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने हेतु की-स्टोन प्रजातियों के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के अंत में आंचलिक विज्ञान केंद्र, देहरादून के प्रभारी डॉ. नवीन जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सञ्चालन जाग्रति उनियाल, वैज्ञानिक अधिकारी, यूकॉस्ट ने किया। इस अवसर पर माननीय मंत्री ने परिषद के सामुदायिक रेडियो स्टेशन “विज्ञान वाणी” के माध्यम से विशेष संदेश भी साझा किया।

कार्यक्रम में यूकॉस्ट एवं आंचलिक विज्ञान केंद्र के अधिकारियों के साथ-साथ माया देवी यूनिवर्सिटी तथा तुलाज इंस्टिट्यूट के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

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