बीकेटीसी में दो नए विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति

बीकेटीसी के नियमों के पालन पर उठे सवाल

शासन ने 22 मई को बनाये दो विशेष आमंत्रित सदस्य

बीकेटीसी ने फरवरी माह में बनाये थे दो Co-opted सदस्य और

अविकल थपलियाल

जोशीमठ/देहरादून। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बीकेटीसी में पैदा हो रहे विवादों के चलते भाजपा सरकार व संगठन दोनों सकते में हैं। एक विवाद थमता है तो दूसरा शुरू हो जाता है। वीआईपी मेहमानों की आवभगत पर श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के पैंसे खर्च करने के मामले की गूंज तो दिल्ली तक सुनाई दी है।

ताजातरीन विवाद बीकेटीसी में दो विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति को लेकर सामने आया है। बीकेटीसी ने जिस धारा के तहत फरवरी माह में दो विशेष आमंत्रित (अनुमेलित सदस्य) सदस्यों की नियुक्ति की थी, शासन ने उसी धारा का हवाला देते हुए विगत दिनों अपने स्तर से दो अन्य लोगों को विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त कर दिया है।

पर्यटन व धर्मस्व सचिव धीराज गर्ब्याल की ओर से 22 मई को जारी आदेश के मुताबिक श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939 की धारा -26 की उपधारा– 2 (छ) के तहत प्रदत्त शक्तियों के क्रम में कमला बगवाड़ी व जेपी सेमवाल को बीकेटीसी में विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया गया है।

शासन के इस आदेश से बीकेटीसी में नियम-कानूनों को ताक पर रखने के आरोपों की पुष्टि ही नहीं हुई, बल्कि बीकेटीसी हंसी का पात्र भी बन गई है।
     
दरअसल, इस फरवरी माह में बीकेटीसी ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939 की धारा -26 की उपधारा– 2(छ) का हवाला देते हुए दो तीर्थ पुरोहितों  राजकुमार तिवारी व रजनीश प्रसाद भट्ट को अनुमेलित सदस्य (Co-Opted member) के रूप में नामित कर दिया था। लेकिन शासन की ओर से इस नियुक्ति का नोटिफिकेशन प्रकाश में नहीं आया।

इनमें से राजकुमार तिवारी केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के संगठन केदार सभा के अध्यक्ष हैं। तिवारी ने विगत वर्ष कपाट बंद होने से पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष द्विवेदी की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। साथ ही द्विवेदी को नहीं हटाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। तब काफी  मनुहार के बाद तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा शांत हुआ था। तिवारी को नामित करने के पीछे उन्हें ‘मैनेज’ करने का प्रयास माना जा रहा था।

बीकेटीसी द्वारा अपने स्तर से सदस्यों की नियुक्ति किए जाने पर उस समय नियम-कानूनों को ताक पर रखने के आरोप लगे थे। अब शासन से भी उसी धारा के तहत अन्य लोगों को सदस्य नियुक्त करने से बीकेटीसी की स्थिति हास्यास्पद हो गई है।

गौरतलब है कि मंदिर समिति एक्ट की धारा – 26 राज्य सरकार को बीकेटीसी के संबंध में नियम बनाने की शक्ति प्रदान करती है। इस धारा में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार मंदिर समिति अधिनियम के किन-किन प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। अर्थात इन नियमों के अंदर यह तय किया जाता है कि मंदिर समिति क्या-क्या कर सकती है।

धारा-26 की उपधारा-2 (छ) मंदिर समिति को दो ऐसे सदस्य नामित करने का अधिकार देती है, जिन्हें बीकेटीसी की किसी भी बैठक में मत देने का अधिकार नहीं होगा। मगर जिस धारा -26 की यह उपधारा है, उनके क्रियान्वयन के लिए पहले शासन नियम बनाएगा।

अर्थात मंदिर समिति एक्ट के अनुसार पहले प्रदेश सरकार नियम बनाएगी कि बीकेटीसी दो अनुमेलित सदस्यों का चयन किस प्रकार से करेगी अथवा उनके चयन का आधार क्या होगा आदि-आदि। उसके पश्चात ही बीकेटीसी उस नियम के अनुसार 2 लोगों को शामिल कर सकती है।

मगर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी द्वारा जारी नियुक्ति पत्र में शासन के किसी पत्र अथवा आदेश का उल्लेख नहीं किया गया था। इसका सीधा अर्थ यह निकला कि बीकेटीसी ने बिना शासन की अनुमति अथवा स्वीकृति के यह आदेश जारी किया था।

जानकारों के अनुसार पहले से ही विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति शासन द्वारा ही की जाती रही है और उसके लिए बाकायदा अधिसूचना जारी की जाती रही है। बीकेटीसी के स्तर से खुद ही सदस्य नामित करने का यह पहला उदाहरण था।

देखें नियुक्ति आदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *