एक दिन में 6997 गर्भवतियों की हुई जांच
उत्तराखंड में 709 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी चिन्हित, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का दावा
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के 10 वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को उत्तराखंड के सभी जनपदों में विशेष जांच सत्र और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्यभर में 6997 गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) सेवाएं प्रदान की गईं, जबकि 709 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान कर उनके उपचार और रेफरल की व्यवस्था की गई।
भारत सरकार ने 9 जून 2016 को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच, परामर्श और उपचार उपलब्ध कराना तथा उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक पीएमएसएमए पोर्टल पर 2 लाख 9 हजार 125 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। उन्हें नियमित जांच और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 10वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष सत्रों में 4021 महिलाओं को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तथा 3129 महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं प्रदान की गईं। इस दौरान 748 महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच भी कराई गई।
अभियान के तहत गंभीर एनीमिया, गर्भकालीन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस-बी, पूर्व सिजेरियन प्रसव, जुड़वां गर्भावस्था तथा अन्य जटिल परिस्थितियों वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी की जाती है। विभाग का कहना है कि समय पर पहचान और उपचार से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को कम करने में मदद मिली है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने उत्तराखंड में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत आधार प्रदान किया है। राज्य सरकार प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, समय पर जांच और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान और प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि नियमित एएनसी जांच, विशेषज्ञ परामर्श और प्रभावी रेफरल व्यवस्था के कारण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आया है। वहीं स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पाण्डेय ने बताया कि डिजिटल निगरानी, पोर्टल आधारित ट्रैकिंग और सशक्त रेफरल प्रणाली के माध्यम से सेवा वितरण को अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया गया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि पीएमएसएमए पोर्टल और मैटरनल वॉर रूम के माध्यम से उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।



