दालचीनी उत्पादन में उत्तराखंड बनाएगा नई पहचान

अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ

महक क्रांति नीति के तहत 5200 हेक्टेयर में होगी खेती

20,800 किसानों को मिलेगा लाभ

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गुरुवार को सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सुगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (पारडी) में “दालचीनी प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम में भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा किसानों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में गणेश जोशी ने कहा कि दालचीनी पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार उत्तराखंड की दालचीनी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महक कान्ति नीति के तहत दालचीनी और अन्य सुगंधित फसलों की खेती को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा दिया जाएगा।
विदेशी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुभवों से किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलेगी तथा उनकी आय में वृद्धि होगी।
सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडे ने बताया कि महक कान्ति नीति के अंतर्गत सुगंधित फसलों के विकास के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है। नीति के सफल क्रियान्वयन से राज्य के एरोमा सेक्टर का वार्षिक कारोबार 1180 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

निदेशक, परफ्यूमरी एवं सुगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने बताया कि उत्तराखंड महक कान्ति नीति 2026-36 के तहत नैनीताल और चम्पावत जनपदों में 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में दालचीनी की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना से लगभग 20,800 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम में फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष योगेश दूबे, एसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सुनीत गोयल तथा सुगंध व्यापार संघ, नई दिल्ली के अध्यक्ष रोहित सेठ ने काशीपुर में विकसित किए जा रहे एरोमा पार्क की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने एरोमा उद्योग को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।
सेमिनार में श्रीलंका के नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के उपनिदेशक चिंधका विदाना पथिराना, प्योर सिनेमन एक्सपोर्ट्स के निदेशक मुदिता जयतिलका तथा इंडोनेशिया के रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स के वैज्ञानिक डॉ. सेटियारी मरवान्तो सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए। इसके अलावा स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया, आईसीएआर, सीएसआईआर, एफएसएसएआई, डाबर इंडिया लिमिटेड और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

तकनीकी सत्र में श्रीलंका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञों ने दालचीनी की उन्नत नर्सरी तकनीक, प्रवर्धन, उत्पादन और वैश्विक बाजार की संभावनाओं पर व्याख्यान दिए। वहीं आईसीएआर अंडमान एवं निकोबार के वैज्ञानिक डॉ. अजित वमन ने आधुनिक कृषि पद्धतियों और दालचीनी की उन्नत खेती से जुड़े अनुभव साझा किए। सेमिनार के दौरान विभिन्न देशों और राज्यों के दालचीनी उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

इस अवसर पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह गुसाईं, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की उपाध्यक्ष सोना सजवाण, अपर सचिव कृषि डॉ. आनंद श्रीवास्तव सहित कृषि, उद्यान, रेशम, बायोटेक तथा अन्य विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज बिजल्वाण ने किया।

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