पर्यटन सीजन – बाजार से गायब आड़ू, प्लम और खुमानी

आड़ू-प्लम-खुमानी की बात’ अभियान का समापन

धाद ने उठाई व्यवस्थित विपणन की मांग

स्टोन फ्रूट्स को पहाड़ की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आड़ू, प्लम और खुमानी जैसे स्टोन फ्रूट्स की भरपूर पैदावार होती है, लेकिन विडंबना यह है कि पर्यटन सीजन में लाखों पर्यटकों के प्रदेश पहुंचने के बावजूद इन स्थानीय फलों के लिए आज तक कोई सशक्त और व्यवस्थित बाजार विकसित नहीं हो सका है।

इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर सामाजिक संस्था धाद ने ‘आड़ू-प्लम-खुमानी की बात’ अभियान चलाया। 15 दिनों तक चले इस अभियान का समापन स्मृति वन में गीत-संगीत, संवाद, आड़ू की चाट और माल्टा रस के साथ हुआ, जहां विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्टोन फ्रूट्स को पहाड़ की आजीविका और अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
धाद के सचिव तन्मय ने समापन अवसर पर कहा कि पहाड़ का स्वच्छ वातावरण और अनुकूल जलवायु फलों की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है, लेकिन आड़ू, प्लम और खुमानी जैसे फलों के लिए अभी तक संगठित विपणन व्यवस्था नहीं बन पाई है। उन्होंने कहा कि इसी प्रश्न को समाज और सरकार के सामने मजबूती से रखने के लिए धाद ने यह पहल शुरू की है।

धाद के हरेला गांव अध्याय द्वारा आयोजित यह अभियान 30 मई को नैनबाग में किसान कुंदन सिंह पंवार के बगीचे से शुरू हुआ था। अभियान के दौरान विशेषज्ञों के साथ विमर्श, किसानों से संवाद, मांगपत्र तैयार करने और शासन स्तर पर पैरवी जैसे प्रयास किए गए। तन्मय ने बताया कि पिछले वर्ष उत्तराखंड हिमालय में शुरू की गई स्टोन फ्रूट्स की पक्षधरता को इस अभियान के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है।
कार्यक्रम में रंगकर्मी मीनाक्षी जुयाल और सुदीप जुगरान की उपस्थिति में आयोजित ओपन माइक सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और गीत प्रस्तुत किए।

उद्यान विशेषज्ञ बीरबान सिंह रावत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जल संकट और श्रम की उपलब्धता जैसी चुनौतियों के बीच स्टोन फ्रूट्स की बागवानी पहाड़ के किसानों के लिए एक बेहतर और टिकाऊ विकल्प बन सकती है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय बागवानी के भविष्य में इन फलों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
कार्यक्रम संयोजक नीलेश ने कहा कि अभियान के दौरान विभिन्न पक्षों से हुई बातचीत और अनुभवों से जो समझ विकसित हुई है, उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
अध्यक्षीय संबोधन में धाद के पूर्व अध्यक्ष हर्षमणि व्यास ने कहा कि जिस प्रकार धाद के माल्टा अभियान को पहले समाज और बाद में सरकार की स्वीकृति मिली, उसी प्रकार स्टोन फ्रूट्स को लेकर शुरू की गई यह पहल भी सकारात्मक परिणाम देगी। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर हुई वार्ताओं से निकट भविष्य में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

इस अवसर पर राजेश्वरी कठैत, डॉ. ए.एस. कठैत, सुरेंद्र बिष्ट, विजया रावत, देवेंद्र कांडपाल, मंजीत सिंह, रमेंद्र कौर, नरेंद्र रावत, मनोहर लाल, दयानंद डोभाल, सुरेंद्र अमोली, नितिन चमोली, निमेष बैनी, मीनू डबराल, रवि गुप्ता, एम.एस. बहुगुणा, रेखा बहुगुणा, ग्रुप कैप्टन मनमोहन सिंह रावत, रुचिका रावत, अतेंद्र व्यास, आकृति, हेमवती नंदन व्यास, हरीशंकर जोशी, एच.वी. वर्मा, हिमांशु अवस्थी, रेखा अवस्थी, धर्म सिंह, अनिमेष गुप्ता, नीना रावत, आशा डोभाल, बीना रावत, ममता डोभाल, बीरेंद्र खंडूरी, साकेत रावत, बृजमोहन उनियाल, अर्चना ग्वाड़ी, प्रशांत रतूड़ी, कांति ग्वाड़ी, प्रदीप डिमरी, सुरेश कुकरेती, सुशीला गुसाईं और कंचन बुटोला सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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