हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में विजिलेंस का शिकंजा

आठ टीमों ने आरोपियों के ठिकानों पर की छापेमारी

सरकार की सख्ती के बीच तेज हुई जांच

भूमि खरीद घोटाले में साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई जारी

अविकल उत्तराखण्ड


देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले की जांच में शुक्रवार को सतर्कता अधिष्ठान उत्तराखंड ने बड़ा कदम उठाते हुए आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। थाना सतर्कता सेक्टर, देहरादून में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 12/2026 में न्यायालय से जारी सर्च वारंट के अनुपालन में विजिलेंस की आठ टीमों ने आरोपियों के घरों पर हाउस सर्च शुरू किया। तलाशी के दौरान दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

लखनऊ, दिल्ली समेत छह शहरों में सर्च ऑपरेशन, अहम दस्तावेज किए गए जब्त

हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाला प्रकरण में जांच के दौरान दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध राज्य सरकार की अनुमति से थाना सतर्कता सेक्टर, देहरादून में अभियोग दर्ज किए जाने के बाद शुक्रवार को विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई की।

26 जून को नामजद 10 आरोपितों—वरुण चौधरी, रविंद्र कुमार दयाल, लक्ष्मीकांत, आनंद मिश्रवाण, वेदपाल, दिनेश कांडपाल, जितेंद्र कुमार, सुमन देवी, अभिषेक और सुजीत कुमार—के आवासों पर घोटाले से संबंधित पत्रावलियों तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की तलाश के लिए छापेमारी की गई।

सक्षम न्यायालय से जारी सर्च वारंट के अनुपालन में सतर्कता अधिष्ठान ने लखनऊ, दिल्ली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश और देहरादून में एक साथ व्यापक सर्च अभियान चलाया। इसके लिए आठ टीमें गठित की गईं, जिन्होंने सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर तलाशी की कार्रवाई की।
प्रारंभिक तलाशी के दौरान कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के कब्जे से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं। सतर्कता अधिष्ठान के अनुसार, इन दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की जांच और विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में भी संलिप्त रहे हैं या नहीं।


यह मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा 54 करोड़ भूमि घोटाला खरीद में अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप है कि नगर निगम के लिए भूमि खरीद के दौरान बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर सौदा किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंची। मामला सामने आने के बाद यह प्रदेश के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल हो गया।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन ने मामले की सतर्कता जांच कराने का निर्णय लिया। जांच के दौरान कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में आई, जिसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।


शुक्रवार को न्यायालय से प्राप्त सर्च वारंट के आधार पर सतर्कता अधिष्ठान की आठ टीमों ने सभी नामजद आरोपियों के आवासों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से जांच को महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं। विजिलेंस ने संकेत दिए हैं कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


यह कार्रवाई राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब तक की सबसे महत्वपूर्ण जांचों में से एक मानी जा रही है।

(कुछ दिन पूर्व इस मुद्दे पर धामी सरकार ने निम्नलिखित कार्रवाई की थी)

हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण – छह अधिकारियों समेत 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज होगा

हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाला-एक आईएएस की होगी बर्खास्तगी

दो आईएएस समेत 10  आरोपियों पर दर्ज होगा मुकदमा

पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति
तत्कालीन एसडीएम को प्रतिकूल प्रविष्टि

विजिलेंस जांच में मिली अनियमितताओं की पुष्टि

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। शासन ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र एवं धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।

हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है।

प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।
दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है।

इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज किए जाने का मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी द्वारा अनुमोदन किया गया है। जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले की प्रथम जॉच आईएएस रणवीर सिंह चौहान ने की थी। उनकी रिपोर्ट के बाद जांच का दायरा आगे बढ़ा।

अभियोग दर्ज किए जाने वाले व्यक्तियों में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त  रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक  लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक  वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में  सुमन देवी,  जितेन्द्र कुमार,  अभिषेक यादव तथा  सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शासन की प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हरिद्वार जमीन घोटाला-एक नजर

हरिद्वार नगर निगम द्वारा लगभग 13 से 14 करोड़ रुपये की सस्ती कृषि भूमि (जो कचरे के ढेर के पास थी) को नियमों को दरकिनार कर 54 करोड़ रुपये में खरीदने का मामला है।
इस अत्यधिक अनियमित खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली सामने आई।

घोटाले का मुख्य कारण

नगर निगम ने सराय ग्राम में 33 बीघा जमीन भारी भ्रष्टाचार के तहत 54 करोड़ रुपये में खरीदी। यह जमीन किस उद्देश्य के लिए खरीदी गई, इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं था और न ही कोई पारदर्शी बोली (bidding) प्रक्रिया अपनाई गई।

दोषी अधिकारी

  100 पन्नों की जांच रिपोर्ट के आधार पर, तत्कालीन डीएम (IAS) कर्मेन्द्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त (IAS) वरुण चौधरी, और एसडीएम (PCS) अजयवीर सिंह सहित लगभग 12 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
इन सभी अधिकारियों को राज्य सरकार द्वारा निलंबित कर दिया गया था।

सतर्कता जांच (Vigilance Probe)-

इस मामले को राज्य की सतर्कता विभाग (Vigilance Department) को सौंप दिया गया। इसके बाद कई आरोपित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मंजूरी भी दी गई।

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