दो जुलाई को सीबीआई कार्यालय पर होगी तालाबंदी
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ऑनलाइन बैठक में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की प्रगति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। बैठक में कहा गया कि मामले की जांच सीबीआई को हस्तांतरित हुए करीब छह माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस और स्पष्ट प्रगति सामने नहीं आई है। इससे पीड़ित परिवार और आम जनता में निराशा तथा असंतोष का माहौल है।
बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अब तक सीबीआई ने अंकिता भंडारी के माता-पिता के बयान भी दर्ज नहीं किए हैं। साथ ही मामले में चर्चित कथित वीआईपी व्यक्तियों की भूमिका की जांच को लेकर भी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। रिसॉर्ट ध्वस्तीकरण और संभावित साक्ष्यों के नष्ट होने से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर सवाल उठाए गए।
संघर्ष मंच का कहना है कि जांच की दिशा और गति को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। बैठक में बताया गया कि स्थानीय सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय स्तर से संचालित की जा रही है। मंच ने कहा कि घटना उत्तराखंड में हुई है, इसलिए राज्य स्तर पर भी जांच एजेंसियों की सक्रिय भूमिका दिखाई देनी चाहिए।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि लगभग दो सप्ताह पूर्व सीबीआई निदेशक को पत्र भेजकर जांच की प्रगति सार्वजनिक करने और जांच में तेजी लाने की मांग की गई थी। पत्र में चेतावनी दी गई थी कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर संतोषजनक प्रगति नहीं हुई तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि जांच की वर्तमान स्थिति में सुधार नहीं होता है तो 2 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय पर तालाबंदी और विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
संघर्ष मंच ने प्रदेश की जनता, सामाजिक संगठनों और न्यायप्रिय नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होकर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मुहिम को मजबूत करने की अपील की।



