ट्रांसफर सत्र खत्म, फिर भी तीन दिन का अतिरिक्त समय!

देखें आदेश, आयुर्वेद निदेशालय के आदेश पर उठे सवाल

30 जून अंतिम तिथि के बाद 3 जुलाई तक मांगे स्थानांतरण प्रस्ताव

शासन के नियमों से अलग आदेश चर्चा में

अविकल थपलियाल

देहरादून। उत्तराखंड शासन द्वारा वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 के लिए 30 जून 2026 अंतिम तिथि निर्धारित किए जाने के बावजूद आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय ने स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है। निदेशक विजय कुमार जोगदंडे के हस्ताक्षर से 30 जून को जारी कार्यालय आदेश अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

कार्यालय आदेश में कहा गया है कि वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 के तहत स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करने के लिए समिति का गठन किया गया था, लेकिन निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद भी समिति ने प्रस्ताव उपलब्ध नहीं कराए। ऐसे में समिति को निर्देशित किया गया है कि वह आगामी तीन दिनों के भीतर स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर निदेशक के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करे, ताकि आगे की कार्रवाई में विलंब न हो।

यहीं से सवाल खड़े होने लगे हैं। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 30 जून 2026 वार्षिक स्थानांतरण की अंतिम तिथि है और इसके बाद स्थानांतरण सत्र समाप्त माना जाएगा। ऐसे में 30 जून को ही जारी आदेश में 3 जुलाई तक प्रस्ताव मांगे जाने का औचित्य क्या है? प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी नहीं हुई, तो बाद की कार्रवाई नियमों के अनुरूप होने पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

सूत्रों के अनुसार, आयुष विभाग में स्थानांतरण सूची को लेकर लंबे समय तक सहमति नहीं बन सकी। यह भी चर्चा है कि एक वरिष्ठ अधिकारी के संभावित तबादले की अटकलों के चलते समिति अंतिम सूची पर निर्णय नहीं ले सकी। कुछ सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि डिस्पैच रजिस्टर को वरिष्ठ स्तर पर अपने नियंत्रण में रखा गया, जिससे आदेशों के निर्गमन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि वर्तमान में आईएएस विजय कुमार जोगदंडे के पास अपर सचिव आयुष और निदेशक आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं की दोहरी जिम्मेदारी है। इसके अलावा वे मुख्य सचिव के स्टाफ ऑफिसर तथा अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी का दायित्व भी संभाल रहे हैं। अब देखना होगा कि शासन इस आदेश को किस दृष्टि से देखता है और स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

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