सहसपुर की महिलाओं ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह

आईटीबीपी को पहुंचा रहीं ऑर्गेनिक सब्जियां

किसानों को मिला सीधा बाजार और महिलाओं की बढ़ी आमदनी

13 क्विंटल से अधिक सब्जियों की आपूर्ति

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। सहसपुर विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बन रही हैं। जिला प्रशासन, उद्यान विभाग और ग्रामोत्थान (रीप) की पहल से उड़ान क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं स्थानीय किसानों से ताजी एवं ऑर्गेनिक सब्जियां खरीदकर सीमाद्वार स्थित आईटीबीपी को नियमित रूप से उपलब्ध करा रही हैं। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, वहीं महिलाओं को रोजगार और आय का नया स्रोत भी मिला है।

सहसपुर ब्लॉक की आमवाला नई पंचायत के कोटरा संतूर गांव की महिलाएं गांव-गांव से किसानों की उपज एकत्र कर आईटीबीपी तक पहुंचाती हैं। वर्तमान में समूह आईटीबीपी की कुल आवश्यकता का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर रहा है। अप्रैल से अब तक पांच चरणों में 317, 181, 209, 306 और 328 किलोग्राम सहित 13 क्विंटल से अधिक ऑर्गेनिक सब्जियों की आपूर्ति की जा चुकी है।

आईटीबीपी को आलू, टमाटर, गोभी, बैंगन, लौकी, भिंडी, शिमला मिर्च, मशरूम, करेला, धनिया, कद्दू और खीरा जैसी सब्जियां नियमित रूप से भेजी जा रही हैं। भविष्य में मांग 50 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। मांग बढ़ने पर विकासनगर, लांघा और डोईवाला क्षेत्र के किसानों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा।

समूह की सदस्य लीना धीमान ने बताया कि इस पहल से किसानों को बिना बिचौलियों के सीधा बाजार मिल रहा है, जबकि महिलाओं को रोजगार और बेहतर आमदनी का अवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही आईटीबीपी के जवानों को ताजी और पौष्टिक ऑर्गेनिक सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि अब तक समूह की महिलाओं द्वारा 13 क्विंटल से अधिक ऑर्गेनिक सब्जियां आईटीबीपी को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। उन्होंने इस मॉडल से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने के निर्देश भी दिए हैं।

मुख्य उद्यान अधिकारी डी.के. तिवारी ने बताया कि अब तक एक लाख रुपये से अधिक मूल्य की सब्जियों की आपूर्ति की जा चुकी है। वहीं जिला परियोजना प्रबंधक (रीप) सोनम गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक आपूर्ति पर समूह को एक से दो हजार रुपये तक का लाभ हो रहा है, जिससे महिलाओं की आजीविका मजबूत हो रही है। साथ ही किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य और आईटीबीपी के जवानों को गुणवत्तापूर्ण ऑर्गेनिक सब्जियां मिल रही हैं।

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