आरटीआई में 29 वर्ष से हरिद्वार में तैनाती की हुई पुष्टि
सीएम को भेजा शिकायती पत्र
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड परिवहन विभाग के एक कर्मचारी 29 साल से हरिद्वार जिले में ही तैनात है।
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेज में संबंधित सईद अहमद की लगभग 29 वर्ष तक हरिद्वार जनपद में तैनाती की पुष्टि होने का दावा किया गया है।

इसी बीच सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जवाब में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय, रुड़की ने बताया है कि 28 फरवरी 2026 तक सईद अहमद ने हरिद्वार जनपद में 29 वर्ष, 3 माह और 10 दिन की सेवा पूरी की है।
आरटीआई के इस जवाब के बाद शिकायतकर्ता ने लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के मुद्दे को भी गंभीर बताते हुए इसकी जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से सम्बंधित कर्मचारी पर लगे गड़बड़ी की जांच की भी मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों पर परिवहन विभाग अथवा संबंधित कर्मचारी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।
अनियमितताओं की जांच की मांग
परिवहन विभाग में कार्यरत मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (सीएओ) सईद अहमद की नियुक्ति, पदोन्नति और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी गई है।

शिकायतकर्ता नौनिस चौधरी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में दावा किया गया है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त जानकारी के आधार पर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सईद अहमद पिछले करीब 29 वर्षों से हरिद्वार जनपद में ही तैनात हैं, जबकि राज्य की स्थानांतरण नीति के अनुसार इतनी लंबी अवधि तक एक ही जनपद में बने रहना नियमों की भावना के विपरीत है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि उनकी पदोन्नति और संविलयन (मर्जर) की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि उन्हें वरिष्ठ सहायक के पद पर संविलयन के बाद सीएओ पद तक पदोन्नत किया गया, जबकि इस पूरी प्रक्रिया और कंप्यूटर दक्षता प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल खड़े किए गए हैं।
पत्र में वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वाहन पंजीकरण प्रभारी रहते हुए कई महंगे वाहनों, विशेष रूप से सुजुकी हायाबुसा जैसी मोटरसाइकिलों के पंजीकरण में आधी दर (हाफ रेट) पर टैक्स लेकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि विभागीय जांच में इस मामले को “क्लीन चिट” देने का प्रयास किया गया।
इसके अलावा शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारी कार्यालय समय में बिना अनुमति धार्मिक कार्यों के नाम पर लंबे समय तक अनुपस्थित रहते हैं, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित होते हैं।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से सरद अहमद के सेवा अभिलेख और पदोन्नति की विस्तृत जांच, कथित टैक्स चोरी से हुई राजस्व हानि की वसूली, पूरे प्रकरण में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच तथा लंबे समय तक एक ही जनपद में तैनाती के कारणों की पड़ताल कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
(यह खबर मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत और उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या संबंधित अधिकारी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। “अविकल उत्तराखण्ड” इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता। सम्बंधित दूसरे पक्ष का जवाब मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा।)



