स्मृति शेष- यादें रह जाती हैं, इंसान चला जाता है…

पूर्व आईएएस स्वर्गीय चंद्र सिंह- भावभीनी श्रद्धांजलि

वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसाईं

गुरुवार की सुबह 4 बजे, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आदरणीय चंद्र सिंह साहब 84 वर्ष की आयु में अपना पार्थिव सफर पूरा कर महाप्रयाण कर गए। उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन मेरे पास उनके साथ बिताए अंतिम पलों की एक ऐसी धरोहर है, जिसे मैं जीवनभर संजोकर रखूंगा।

बीती 6 जून की ही तो बात है। कुंवर प्रसून जी की किताब के संदर्भ में चर्चा करने के लिए मैंने उनके साथी, ऋषिकेश के वरिष्ठ अधिवक्ता और 1977 में टिहरी गढ़वाल के जनता दल के अध्यक्ष रहे शीशराम कंसवाल जी को देहरादून बुलाया था।
मैंने कंसवाल जी से सहज भाव में कहा था: “आप और हम तो साथ में खाना खाएंगे, चाय पियेंगे और पुरानी यादें ताज़ा करेंगे ही… लेकिन क्यों न हम थोड़ा वक्त निकालकर चंद्र सिंह साहब से भी मिल लें?”

मेरी यह बात सुनते ही एडवोकेट कंसवाल जी का चेहरा खिल उठा। उन्होंने तुरंत कहा, “अरे! यह तो आपने बहुत ही बढ़िया बात कही। उनसे मिलना तो बहुत ज़रूरी है।”

और फिर, हम तीनों के बीच वह आत्मीय वार्तालाप हुआ। बहुत सारी बातें हुईं, पुराने दौर की यादें ताज़ा हुईं और हमने साथ में एक तस्वीर भी ली। किसे पता था कि विधाता ने इस मुलाकात को हमारी ‘अंतिम मुलाकात’ और इस तस्वीर को हमारी ‘आखिरी फोटो’ बनाने के लिए ही यह ताना-बाना बुना था। ऐसा लगता है मानो नियति हमें उनसे आखिरी बार मिलाने ही उनके घर ले आई थी।
एक कुशल प्रशासक, बेहद सरल स्वभाव के धनी और हम सभी के मार्गदर्शक चंद्र सिंह साहब आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी स्मृतियां, उनका वो मुस्कुराता चेहरा हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा।

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई,
एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया।

परमपिता परमेश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके शोकाकुल परिवार व शुभचिंतकों को इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
भावभीनी श्रद्धांजलि! ॐ शांति!

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