खजांची को हटाया, कई और कर्मचारी रडार पर
चढ़ाव चोरी के अलावा अन्य विशेष दर्शनों की पर्ची आदि मुद्दों की होगी जांच?
आईएएस आनंद स्वरूप के नेतृत्व में शासन की उच्चस्तरीय समिति ने संभाली कमान
गणना प्रक्रिया और रिकॉर्ड की हो रही गहन पड़ताल
अविकल थपलियाल
देहरादून/बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे में हेराफेरी का मामला अब केवल एक कर्मचारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है। शासन की ओर से गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए 14 जुलाई को बदरीनाथ धाम में डेरा डाल दिया है।
आईएएस अधिकारी एवं गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप के नेतृत्व में समिति दान-चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, अभिलेखों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है।
दूसरी ओर, एसआईटी की जांच में नए नाम सामने आने के बाद मंदिर समिति के भीतर भी कार्रवाई शुरू हो गई है।
वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने खजांची संदेश मेहता को उनके पद से हटा दिया है। उन्हें नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा मंदिर समिति के तीन अन्य कर्मचारियों और एक श्रद्धालु की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
सूत्रों के मुताबिक, तीनों कर्मचारियों को नोटिस दिए जाने की तैयारी है, जबकि सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले श्रद्धालु से पूछताछ की जाएगी।
आईएएस आनंद स्वरूप के नेतृत्व वाली उच्चस्तरीय समिति ने बदरीनाथ पहुंचकर एसआईटी और मंदिर समिति के अधिकारियों से अब तक की जांच का विस्तृत ब्यौरा लिया। समिति ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां दानपात्रों से निकले चढ़ावे की गणना की जाती है। गणना की पूरी प्रक्रिया को समझने के साथ-साथ कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
समिति ने दान-चढ़ावे की गणना से जुड़े सभी अभिलेख, रजिस्टर और दस्तावेज एसडीएम ज्योतिर्मठ के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जांच के दौरान चांदी से संबंधित रिकॉर्ड में ओवरराइटिंग मिलने की जानकारी भी सामने आई है, जिसे जांच समिति ने गंभीरता से लिया है। माना जा रहा है कि रिकॉर्ड में की गई किसी भी तरह की काट-छांट या बदलाव की फोरेंसिक और प्रशासनिक स्तर पर भी पड़ताल कराई जा सकती है।
फिलहाल, जांच का केंद्र 25 जून से 2 जुलाई के बीच हुई दान-चढ़ावे की गणना है। इस अवधि के सीसीटीवी फुटेज और अभिलेखों को खंगाला जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, 25 जून को गणना के दौरान एक श्रद्धालु के अपनी जेब में कुछ सामग्री रखने की तस्वीर कैमरे में कैद हुई है। उसकी पहचान कर ली गई है।
बताया जा रहा है कि वह विष्णुप्रयाग परियोजना से जुड़ा हुआ है और पूर्व में भी गणना प्रक्रिया में शामिल होता रहा है।
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि बदरीनाथ मंदिर परिसर में कुल 26 दानपात्र स्थापित हैं। इनमें मंदिर के भीतर दो, परिसर में तीन तथा सिंहद्वार सहित अन्य स्थानों पर 21 दानपात्र लगे हुए हैं। इन सभी दानपात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत एक साथ खोला जाता है और मंदिर अधिकारी तथा सहायक मंदिर अधिकारी की मौजूदगी में दान-चढ़ावे की गणना की जाती है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले लगे नये सीसीटीवी कैमरों में चोरी की यह घटना रिकार्ड हुई है। पुराने कैमरों में स्टोरेज की सीमा दो हफ्ते तक ही थी। नये कैमरे करीब 32 जगह लगाए गए हैं।
शासन की उच्चस्तरीय समिति और एसआईटी की समानांतर जांच से स्पष्ट है कि सरकार इस मामले को केवल विभागीय अनियमितता के रूप में नहीं, बल्कि आस्था और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर प्रकरण के रूप में देख रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हेराफेरी की घटनाएं व्यक्तिगत स्तर तक सीमित थीं या इसके पीछे कोई संगठित तंत्र काम कर रहा था। आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारी एवं कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
कमिश्नर आनन्द स्वरूप, एमडी जीएमवीएन संदीप तिवारी व वित्त सेवा के जगत सिंह चौहान की उच्च स्तरीय जांच टीम विशेष दर्शनों में पर्ची काटे जाने समेत कई अन्य बिंदुओं पर फोकस करेगी तो कुछ और गड़बड़ी सामने आएगी। पर्ची काटने का मुद्दा भी काफी गरमाया हुआ है।
इधऱ, देहरादून में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्वेदी व गणेश गोदियाल के बीच चढ़ावा चोरी और प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति को लेकर वाकयुद्ध जारी है। विपक्षी दलों ने बीकेटीसी अध्यक्ष से इस्तीफे की भी मांग की है।
इधर, पुलिस रिमांड नहीं मिलने पुलिस प्रमोद नौटियाल से पूछताछ नहीं कर पाई।
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…और बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत का इंतजार करते रहे गए गणेश गोदियाल



