लोस में सरकार ने कहा, 180 ब्लॉकों के भूजल स्तर में सुधार

मिशन अमृत सरोवर – 69 हजार जल निकायों का निर्माण और पुनरुद्धार

लोकसभा में सवाल- जवाब

तेज़ी से सशक्त हो रहा भारतीय विमानन क्षेत्र, सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अविकल उत्तराखंड

नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत के लोकसभा में भारतीय विमानन क्षेत्र में विमानों के तेजी से हो रहे विस्तार, सुरक्षा मानकों, समय-पालन और बेड़े के सामंजस्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय में राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लिखित जवाब में बताया कि पिछले तीन वर्षों में भारतीय अनुसूचित एयरलाइनों के बेड़े में बड़े पैमाने पर नए वाइड-बॉडी और नैरो-बॉडी विमान शामिल किए गए हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 112 नए विमान, वर्ष 2024 में 140 नए विमान, वर्ष 2025 में 95 नए विमान तथा वर्ष 2026 में 31 जनवरी तक 8 नए विमान बेड़े में जोड़े गए हैं। इस प्रकार बीते वर्षों में भारतीय विमानन क्षेत्र ने उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिली है।
त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि विमानन क्षेत्र का यह विस्तार देश की बढ़ती आर्थिक शक्ति, यात्री मांग और वैश्विक विश्वास का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विस्तार की गति के साथ सुरक्षा, समय-पालन और सेवा गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा एयरलाइनों की सतत और बहु-स्तरीय निगरानी की जा रही है। इसमें विमानों की उपलब्धता, समय-पालन (OTP), मार्ग युक्तिकरण, प्रशिक्षण, रखरखाव और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (SMS) की नियमित समीक्षा शामिल है। किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर डीजीसीए द्वारा सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाती है।

सांसद रावत ने कहा कि बेड़े का सामंजस्य और सेवाओं का मानकीकरण एयरलाइनों का व्यावसायिक निर्णय है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का नागरिक उड्डयन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा है और सरकार विस्तार के साथ सुरक्षा, विश्वसनीयता तथा यात्रियों के विश्वास को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भूजल संकट पर केंद्र की रणनीति से सुधार, जल संरक्षण में उल्लेखनीय प्रगति
पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत के लोकसभा में देश में भूजल स्तर, अति-दोहित ब्लॉकों, जल संरक्षण, डिजिटल निगरानी और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से जुड़े प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि देश की समग्र भूजल स्थिति में निरंतर सुधार दर्ज किया गया है।

वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2025 तक सुरक्षित आकलन इकाइयों का प्रतिशत 62.6 प्रतिशत से बढ़कर 73.14 प्रतिशत हो गया है, जबकि अति-दोहित इकाइयों का प्रतिशत 17.2 प्रतिशत से घटकर 10.8 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने बताया कि ओडिशा के नवरंगपुर लोकसभा क्षेत्र, कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले तथा जम्मू-कश्मीर की सभी आकलन इकाइयां सुरक्षित श्रेणी में हैं। वहीं कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर क्षेत्र में विशेष निगरानी और वैज्ञानिक हस्तक्षेप जारी है।

राज भूषण चौधरी ने बताया कि अटल भूजल योजना के अंतर्गत सात राज्यों की 8,203 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक सहभागिता आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा मिला है। इसके तहत लगभग 83 हजार जल संरक्षण एवं कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाएं बनाई गईं, 9 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जल-कुशल सिंचाई को बढ़ावा मिला और 229 में से 180 ब्लॉकों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया।

जल शक्ति अभियान और जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम के तहत देशभर में 1.23 करोड़ से अधिक जल संरक्षण और पुनर्भरण संरचनाएं तैयार की गई हैं, जबकि 40 लाख से अधिक कार्य जन आंदोलन के रूप में किए गए हैं। मिशन अमृत सरोवर के तहत लगभग 69 हजार जल निकायों का निर्माण और पुनरुद्धार किया गया है।

सरकार ने रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, रीयल-टाइम टेलीमेट्री, डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर और नैक्यूम 2.0 जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भूजल मानचित्रण, निगरानी और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को सुदृढ़ किया है। यह व्यवस्था ओडिशा, कर्नाटक और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू की जा रही है।

सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार तालाबों, बावड़ियों, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े जल निकायों के पुनर्जीवन को प्राथमिकता दे रही है। जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर और मनरेगा के माध्यम से सामुदायिक सहभागिता से इन पारंपरिक संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया गया है और जल सुरक्षा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

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