आंदोलन का मिजाज भांपने में फेल ,चिंगारी हुई शोले में तब्दील, सदन में चलेंगे अब तीर

पुलिस-प्रशासन के आलाधिकारी भी आंदोलन के सुलग रहे ज्वालामुखी को नहीं बूझ पाये

लाठीचार्ज बना राजनीतिक व सामाजिक मुद्दा

अविकल उत्त्तराखण्ड

गैरसैंण। नन्दप्रयाग-घाट मोटर मार्ग के चौड़ीकरण के मुद्दे पर आंदोलनकारियों पर किये गए लाठीचार्ज की बेशक मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हों। लेकिन इस पूरे मामले से एक बात यह साफ हो गयी है कि पुलिस प्रशासन व खुफिया विभाग आंदोलन के मिजाज को भांपने में पूरी तरह असफल रहा। और न ही आकाओं को इस आंदोलन के आक्रोश व भावनाओं की सही तस्वीर ही पेश की गई। उचित कदम उठाने व निर्णय की लेटलतीफी से ही यह चिंगारी शोले में तब्दील हुई। विधानसभा घेराव में पहाड़ी इलाके से लगभग पांच हजार लोगों का जुटान साफ बता रहा है कि जनता भारी आक्रोश में है। इस पांच हजार की संख्या का भी खुफिया तंत्र अंदाजा नहीं लगा पाया।

लाठीचार्ज में सड़क पर गिरी महिला आंदोलनकारी

अस्सी दिन पहले ग्रामीण जनता ने इस मांग को उठाया और बीते 50 दिन से क्रमिक अनशन जारी था। महिलाएं,वृद्ध, छात्र-छात्राएं भी अपनी पूरी भागीदारी निभा रही हैं। इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा था। आंदोलन के स्वरूप ने इस जिले में ही नही बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी विशेष पहचान बना ली थी। लेकिन जनता की भावनाएं सरकार की चौखट पर नहीं पहुंच पायी। यह प्रशासनिक व राजनीतिक चूक मानी जायेगी। भाजपा के जनप्रतिनिधि भी अपनी सरकार को इस आंदोलन की हकीकत बयां नहीं कर पाए।

ऐसे माहौल में आहूत भराड़ीसैंण बजट सत्र में ही अपनी आवाज पहुंचाना स्थानीय लोगों के लिए एकमात्र विकल्प रह गया था। पूर्व घोषित भराड़ीसैंण कूच/घेराव से भी शासन-प्रशासन सच्चाई को तौल नही पाया। पूरी सरकार गैरसैंण में। पुलिस-प्रशासन के आलाधिकारी भी मौके पर ही। लेकिन विधानसभा घेराव में हजारों लोग कदमताल करेंगे,इसको भी सरकारी एजेंसी सूंघ नही पायी।

आंदोलनकारियों की नारेबाजी,आक्रोश व दबाव को पुलिस बल झेल नहीं पाया। पानी की बौछार और लाठीचार्ज का फैसला भी बूमरैंग साबित हुआ। वीडियो और फ़ोटो में महिलाओं को सड़क पर गिरा साफ देखा जा सकता है। लाठीचार्ज के बाद पथराव का वीडियो भी जारी किया गया।चौतरफा निंदा के बाद पुलिस भी अपना पक्ष देर रात तक भेजती रही। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

देखें वीडियो लाठीचार्ज का

बजट सत्र के पहले दिन सीमांत पहाड़ी अंचल में हुए लाठीचार्ज के जख्म यूँ ही नही भर जाएंगे। महंगाई और बेरोजगारी पर केंद्रित कर चल रही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस व अन्य दलों के लिए यह किसी बड़े चुनावी हथियार से कम नहीं होगा। सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस का इस मुद्दे को लेकर हंगामा करेगी। उधर,सरकार लाठीचार्ज के बाद उठे इस शोरगुल में (विधेयक,अधिनियम, विभागीय रिपोर्ट आदि) सदन के अंदर सरकारी कामकाज निपटायेगी। आंदोलनकारियों के जख्मों पर राजनीति की फिल्म चलती रहेगी..चलती रहेगी..

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गैरसैंण लाठीचार्ज- सीएम त्रिवेंद्र का मजिस्ट्रेटी जांच का ऐलान, घण्टों जाम, पथराव का देखें वीडियो

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