आबकारी नियमों में व्यावहारिक सुधार की मांग, वेडिंग वेन्यू एसोसिएशन ने आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। देहरादून वेडिंग वेन्यू एंड फार्म हाउस एसोसिएशन ने आबकारी नियमों के अनुपालन के दौरान सामने आ रही संचालन संबंधी कठिनाइयों को लेकर आबकारी आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन ने नियमों में व्यावहारिक सुधार करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

एसोसिएशन के अनुसार विवाह स्थल मुख्य रूप से ऐसे आयोजन स्थल होते हैं जहां परिवार विवाह, रिसेप्शन और अन्य सांस्कृतिक समारोह आयोजित करते हैं। इन स्थलों के स्वामी आमतौर पर केवल परिसर और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराते हैं, जबकि खानपान, भोजन और पेय पदार्थों से संबंधित व्यवस्थाएं मेजबान परिवार, कैटरर या आयोजक द्वारा की जाती हैं। ऐसे में कई बार नियमों के अनुपालन को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है।

ज्ञापन में कहा गया है कि सरकारी पंजीकरण पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं के कारण कई आयोजन स्थलों के मालिकों को आवश्यक पंजीकरण पूरा करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। पोर्टल कई बार अनुपलब्ध या निष्क्रिय रहता है, जिससे समय पर अनुपालन प्रभावित होता है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि हाल ही में पुलिस सत्यापन की अनिवार्यता से भी संचालकों में चिंता बढ़ी है और इससे पहले से स्थापित व्यवसायों के संचालन में प्रक्रिया संबंधी विलंब हो रहा है।

ज्ञापन में पूर्व पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान उत्पाद शुल्क नियमों के तहत कानूनी जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्ट जानकारी और लिखित दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है, ताकि हितधारकों को अनुपालन के तरीकों को समझने में सुविधा मिल सके।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने शराब की खरीद केवल निर्धारित विक्रेता से ही करने की अनिवार्यता पर भी पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि किसी भी अधिकृत सरकारी विक्रेता से खरीद की अनुमति देने से पारदर्शिता और सुविधा दोनों सुनिश्चित होंगी।

एसोसिएशन का कहना है कि अधिकांश निजी आयोजनों में शराब की व्यवस्था मेजबान परिवार या कैटरर द्वारा की जाती है, जबकि विवाह स्थल के मालिक केवल स्थान उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में उन पर ऐसी जिम्मेदारियां नहीं डाली जानी चाहिए जो उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं होतीं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आयोजन स्थल के मालिकों के लिए शराब खरीद संबंधी रसीद प्रस्तुत करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता, क्योंकि आमतौर पर शराब की खरीद मेजबान या सेवा प्रदाता द्वारा की जाती है और बोतलों के बैच नंबर से भी यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि खरीद किस दुकान से हुई है।

एसोसिएशन ने विभाग से विवाह स्थलों के लिए लाइसेंसिंग आवश्यकताओं, शराब से संबंधित अनुमतियों और अनुपालन जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का भी अनुरोध किया है।

इसके अतिरिक्त विभाग और विवाह स्थल संचालकों के प्रतिनिधियों के साथ एक परामर्श बैठक आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि उद्योग से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जा सके।

एसोसिएशन के संरक्षक अनिल चड्ढा ने कहा कि एसोसिएशन सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए प्रक्रियाओं का स्पष्ट, पारदर्शी और सुव्यवस्थित होना भी आवश्यक है, जिससे वैध व्यावसायिक गतिविधियां बिना अनावश्यक कठिनाइयों के संचालित हो सकें।

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