अविकल उत्तराखंड
देहरादून। लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने सोमवार को राजधानी में बड़ी रैली निकालकर सरकार को अपनी ताकत दिखाई।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अभियंताओं ने 27 सूत्रीय मांगों के जल्द समाधान की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष आरसी शर्मा ने कहा कि वेतन विसंगति, पदोन्नति और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों पर लंबे समय से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल से हजारों अभियंताओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि अभियंता वर्ग अब अपने अधिकारों के लिए एकजुट है। महासचिव वीरेंद्र गुसाईं ने कहा कि आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा और अंतिम निर्णय तक संगठन पीछे नहीं हटेगा। महासंघ के अनुसार 2 फरवरी से आंदोलन का पहला चरण शुरू हुआ, 10 फरवरी को जिलों में बैठकें हुईं और 18 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर धरना देकर जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। राजधानी में रैली के बाद भी मांगों पर निर्णय न हुआ तो प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी गई है। संगठन ने कहा कि निर्माण कार्यों पर पडऩे वाले असर की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
इन मामलों को लेकर नाराजगी
डिप्लोमा इंजीनियरों की नाराजगी के पीछे वर्षों से लंबित वेतन विसंगति, समयबद्ध पदोन्नति की कमी, पुरानी पेंशन बहाली और रिक्त पदों के कारण बढ़ता कार्यभार जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। अभियंताओं का कहना है कि तकनीकी कार्यों में गैर-तकनीकी दखल से योजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
मुख्य मांगें
- वर्ष 2006 से चली आ रही वेतन विसंगति दूर कर ग्रेड पे 4600 लागू किया जाए
- 10, 16 और 26 वर्ष की सेवा पर समयबद्ध पदोन्नति
- 2005 के बाद नियुक्त अभियंताओं के लिए पुरानी पेंशन बहाल
- तकनीकी संवर्ग का पुनर्गठन और रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती
- फील्ड अभियंताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा बीमा
- गैर-तकनीकी कार्यों में अभियंताओं की ड्यूटी बंद

