“सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण” विषय पर जुटे देश-विदेश के विशेषज्ञ
एसआरएचयू के स्कूल ऑफ योगा साइंसेज की ओर से आयोजित, योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर हुई गहन चर्चा’
डोईवाला- स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट के स्कूल ऑफ योगा साइंसेज (एसवाईएस) की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। “सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए भारतीय ज्ञान प्रणाली और योग का वैज्ञानिक दृष्टिकोण” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात विद्वान, शोधकर्ता और विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र हुए।
विश्वविद्यालय के आदि कैलाश सभागार में सम्मेलन का शुभारंभ संस्थापक डॉ. स्वामी राम के चित्र समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
मानसिक स्वास्थ्य में योग की अहम भूमिका
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि लगभग 70 प्रतिशत शारीरिक बीमारियां मानसिक विकारों से उत्पन्न होती हैं। ऐसे में मन को संयमित करने के लिए ध्यान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब योग और ध्यान के महत्व को स्वीकार कर रहा है, जो मानसिक अवसाद, भय और तनाव जैसी स्थितियों से निपटने में सहायक है।
शरीर और मन के बीच की कड़ी है श्वास
अध्यक्ष डॉ.विजय धस्माना ने कहा कि शरीर और मन के बीच की कड़ी है श्वास। स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है मन का शांत होना। मन को शांत करने के लिए जरूरी है ध्यान। मन के शांत होने से सकारात्मक ऊर्जा हमारे भीतर रहेगी। ध्यान करने में समय जरूर लगता है, लेकिन बेहद आसान है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही योग की स्वीकार्यता
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, अमेरिका के डॉ. सतबीर सिंह खालसा ने अपने संबोधन में कहा कि योग को अब वैश्विक स्तर पर एक प्रभावी पूरक चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता मिल रही है। वहीं, एम्स दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. गौतम शर्मा ने हृदय रोगों के यौगिक प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी साझा की।
महत्वपूर्ण विषयों पर हुआ मंथन
सम्मेलन के दौरान ‘टेक्नो-स्ट्रेस’ और मानव स्वास्थ्य पर योग के प्रभाव जैसे समसामयिक और महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर हिमालयी परंपरा के संवाहक स्वामी ऋतवान भारती ने प्रतिभागियों को डॉ. स्वामी राम की परंपरा से परिचित कराया।
शोध पत्र और तकनीकी सत्रों की भरमार
स्कूल ऑफ योगा साइंसेज के प्रिंसिपल डॉ. रुद्र भंडारी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. सुबोध सौरभ सिंह ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में लगभग 70 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे और करीब 500 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कुल 7 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
प्रमुख हस्तियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल, प्रति कुलपति डॉ. अशोक कुमार देवराड़ी, डॉ. रमेश बिजलानी, डॉ. रीमा दादा सहित अनेक शिक्षाविद, शोधकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

