दिमाग़ दुरुस्त रखना है तो एंटीबायोटिक नहीं, बैक्टीरिया खाएँ!

NCOnNPH में इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. नंदन बिष्ट का शोध-आधारित व्याख्यान

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। नेशनल कॉन्ग्रेस ऑन न्यूट्रिशन एंड पब्लिक हेल्थ (NCOnNPH) में इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. नंदन बिष्ट ने “मनोपोषक जीवाणु (Psychobiotics)” विषय पर शोध-आधारित व्याख्यान देते हुए जनस्वास्थ्य की दिशा में एक नई अवधारणा को रेखांकित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “अनावश्यक एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग ने हमारे शरीर के लाभकारी बैक्टीरिया को नुकसान पहुँचाया है। यदि हमें दिमाग़ दुरुस्त रखना है तो एंटीबायोटिक नहीं, बल्कि अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देना होगा।”

डॉ. बिष्ट ने ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि समझाते हुए बताया कि आंत और मस्तिष्क के बीच स्थापित जैव-रासायनिक संवाद मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा संतुलन और सूजन-नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने हालिया अनुसंधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ विशिष्ट प्रोबायोटिक स्ट्रेन्स मानसिक तनाव, अवसाद और संज्ञानात्मक कार्यों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं — इन्हीं को “मनोपोषक जीवाणु” कहा जाता है।

उन्होंने एंटीबायोटिक के अविवेकपूर्ण उपयोग को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की बढ़ती चुनौती से जोड़ते हुए चेताया कि चिकित्सकीय परामर्श के बिना दवा सेवन जनस्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक खतरा है।

डॉ. बिष्ट ने संतुलित आहार, दही, पारंपरिक किण्वित खाद्य पदार्थ, फाइबर-समृद्ध भोजन और माइक्रोबायोम-संवेदनशील चिकित्सा दृष्टिकोण को राष्ट्रीय स्वास्थ्य रणनीति में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

समापन में उन्होंने कहा,
“स्वस्थ आंत ही स्वस्थ मस्तिष्क और सशक्त समाज की नींव है। पोषण और मनोपोषक दृष्टिकोण को जनस्वास्थ्य की केंद्रीय रणनीति बनाना समय की मांग है।”

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