अविकल उत्तराखंड
देहरादून। ग्राफिक एरा में विकास में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया है। इस सम्मेलन में दुनिया भर के विशेषज्ञ सतत विकास में सूक्ष्मजीवों की भूमिका, नवीन शोध और व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा करेंगे।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज सतत विकास के लिए माइक्रोबॉयल इनोवेशन पर यह दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च देहरादून के डायरेक्टर डॉ एम मधु ने कहा कि सूक्ष्मजीव आधारित तकनीकी मृदा की उर्वरता बढ़ाने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता सुधारने में सहायक है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की गिरती सेहत से पोषण, स्वास्थ्य और राष्ट्र विकास प्रभावित होते हैं, इसलिए सूक्ष्मजीव आधारित टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
कुलपति डॉ नरपिंदर सिंह ने कहा कि माइक्रोबॉयल इनोवेशन जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह कार्बन उत्सर्जन कम करने, अपशिष्ट प्रबंधन सुधारने और हरित तकनीक को बढ़ावा देने में सहायक है।
इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में छह तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें बायोरिमेडिएशन और पर्यावरणीय सततता, फसल उत्पादकता एवं पौध संरक्षण के लिए सूक्ष्मजीव आधारित दृष्टिकोण, उद्योगों में सूक्ष्मजीवों के अनुप्रयोग तथा खाद्य सूक्ष्मजीव विज्ञान और सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यावहारिक चर्चा की जाएंगी। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 10 देशों, 16 राज्यों के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ अपने शोध पत्र और समाधान प्रस्तुत करेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ट्रैफिक अधिनियम यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेण्ट, यूकाॅस्ट, यूसीबी, पीएमएमआईटी सोसायटी, एमबीएसआई ने संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में कुल सचिव डॉ नरेश कुमार शर्मा, माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेण्ट की हेड डॉ अंजू रानी, प्रो पंकज गौतम, डॉ सौरव गंगोला, डॉ देबासीस मित्रा अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। सम्मेलन का संचालन डॉ दिव्या वेणुगोपाल ने किया।

