बजट सत्र में उठा डेढ़ सौ साल पुराना ‘माफी की लकड़ी’ का मामला
अविकल उत्तराखंड
गैरसैंण। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने बजट सत्र के चौथे दिन कार्यस्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए माफी की लकड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने माफी की लकड़ी पर लगी रोक हटाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर के लोगों को विगत 150 से अधिक वर्षों से “माफी की लकड़ी” मिलने की परंपरा प्रचलित है।
परगना जौनसार बावर क्षेत्र के रीति रिवाजों, भूमि व वन अधिकारों से सम्बंधित वर्ष 1872 में दर्ज दस्तावेज वाजुलउलअर्ज़ की दफा 13 इस क्षेत्र के वन अधिकारों (हक हकूक) और संसाधनों के बंटवारे से जुड़ी है, जिसके तहत ग्रामीणों को खेती के औजार बनाने, घर बनाने और अन्य प्रयोजनों के लिये “माफी की लकड़ी” प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है।
उन्होंने कहा कि
वर्ष 1920 में नोटिफाइड ‘पन्नालाल सेटेलमेंट’ के तहत भी जौनसार बावर के जनजातीय लोगों को वन विभाग से “माफी की लकड़ी” का अधिकार प्राप्त होता है।
सरकार द्वारा विगत 3 वर्षों से “माफी की लकड़ी” पर रोक लगाकर हमारे हक हकूकों और अधिकारों पर कुठाराघात किया गया है। विगत वर्षों की रोकी गई माफी की लकड़ी वन विभाग द्वारा इसी वित्तीय वर्ष में जारी की जाये।

