आरटीआई से हुआ खुलासा
निदेशक ने तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट शासन को भेजी
प्रतिवर्ष रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत न किया जाना गंभीर विषय
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। राज्य की लंबित वार्षिक ऑडिट रिपोर्टों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। निदेशक ऑडिट ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक की ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी है।
आरटीआई कार्यकर्ता-रमेश चंद्र पांडे

सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि नौ मार्च से गैरसैंण में प्रस्तावित बजट सत्र के दौरान सरकार इन्हें विधानसभा के पटल पर रख सकती है।
दरअसल, उत्तराखंड लेखा परीक्षा अधिनियम 2012 की धारा 8(3) में स्पष्ट प्रावधान है कि निदेशक लेखा प्रतिवर्ष संहित लेखा परीक्षा रिपोर्ट तैयार कर उसे विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बावजूद पिछले वर्षों में रिपोर्टों को नियमित रूप से सदन में नहीं रखा गया, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

आरटीआई से खुला घटनाक्रम
हल्द्वानी के देवकी विहार निवासी सेवानिवृत्त सहायक ऑडिट अधिकारी रमेश चंद्र पांडे ने ऑडिट निदेशालय से वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक की रिपोर्टों को सदन में रखने संबंधी पत्राचार की जानकारी मांगी थी।
लोक सूचना अधिकारी सुशीला जोशी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार, निदेशक स्तर से 20 दिसंबर 2025 को तीनों वर्षों की रिपोर्ट संयुक्त सचिव (वित्त, ऑडिट प्रकोष्ठ) को भेजी गई थी। इसके बाद शासन स्तर से 23 जनवरी को आपत्तियों के साथ रिपोर्ट वापस की गई। आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद निदेशक आलोक कुमार पांडेय ने 24 फरवरी को संशोधित रिपोर्ट पुन: शासन को भेज दी।

जवाबदेही पर उठे सवाल
रमेश चंद्र पांडे ने कहा कि अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद प्रतिवर्ष रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत न किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि देरी के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि पूर्व में भी आरटीआई और जनदबाव के बाद 2014-15 से 2021-22 तक की आठ वर्षों की रिपोर्ट एक साथ सदन में रखी गई थीं।

उन्होंने कहा कि समय पर रिपोर्ट पेश होने से वित्तीय अनियमितताओं, गबन और प्रक्रियागत त्रुटियों पर प्रभावी चर्चा संभव होगी तथा भविष्य में सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। इससे सरकार के ‘जीरो टॉलरेंसÓ के दावों की भी वास्तविक परीक्षा होगी।

