“गांव की पगडंडियों से लेकर जंगल तक लापता पंकू की खोज

-चार दिन पहले मां के पीछे जंगल की ओर निकला था मासूम

-पुलिस, ग्रामीण, एसडीआरएफ और डाग स्क्वायड जुटा तलाश में

-मासूम के रहस्यमयी परस्थितियों में लापता होने से क्षेत्र में हड़कंप

अविकल उत्तराखण्ड

रुद्रप्रयाग। जनपद के दूरस्थ बाड़ब गांव में इन दिनों सन्नाटा और चिंता का माहौल है। गांव का चार साल का मासूम मयंक, जिसे घर में प्यार से पंकू कहा जाता है, पिछले चार दिनों से लापता है।
मासूम के अचानक यूं गायब हो जाने से परिवार ही नहीं, पूरा गांव गहरे सदमे में है।

ताया जा रहा है कि बीते शनिवार को मयंक अपनी मां के पीछे-पीछे जंगल की ओर निकला था। कुछ ही पलों में वह नजरों से ओझल हो गया। पहले तो परिजनों को लगा कि बच्चा आसपास ही कहीं खेल रहा होगा, लेकिन जब काफी देर तक उसकी कोई आहट नहीं मिली, तो घबराहट बढ़ने लगी।

देखते ही देखते पूरा गांव मयंक की तलाश में जुट गया। ग्रामीणों ने खेतों, पगडंडियों और जंगल के कोने-कोने को छान मारा। सूचना मिलने पर पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दल भी मौके पर पहुंच गए।
चार दिनों से लगातार सर्च ऑपरेशन चल रहा है, लेकिन अब तक मासूम का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, परिवार की उम्मीदें कमजोर पड़ती जा रही हैं। मां की आंखें रो-रोकर सूज चुकी हैं, जबकि पिता हर आने-जाने वाले से बस एक ही सवाल पूछते हैं—“क्या मेरे बच्चे का कहीं कोई पता चला?”
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मासूम को कोई जंगली जानवर उठा ले गया? या फिर यह किसी अपहरण की साजिश है? फिलहाल इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। हर घर में दहशत है, और हर आंख रास्ते पर टिकी है, शायद मयंक कहीं से लौट आए।

प्रशासन ने सर्च ऑपरेशन तेज करने की बात कही है, लेकिन हर गुजरते दिन के साथ अनहोनी की आशंका भी गहराती जा रही है। मासूम मयंक की तलाश अब सिर्फ एक खोज अभियान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की संवेदनाओं की परीक्षा बन चुकी है। (विजय भट्ट)

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