आंदोलन की तपिश में उपलब्धियों को भुनाना बनी अहम चुनौती

अंकिता-सुखवंत-गिरधारी प्रकरण ने भाजपा संगठन को बैकफुट पर धकेला

संगठन अध्यक्ष भट्ट व मंत्रियों को देखने पड़ रहे काले झंडे

योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना ही हमारा मुख्य लक्ष्य-सीएम

अविक्ल थपलियाल

देहरादून। बीते एक महीने से प्रदेश में जारी गर्मागर्मी ने भाजपा संगठन,मंत्रियों और विधायकों के हाथ-पांव बांध दिए है। अपने बयानों से हमेशा चर्चा में रहने वाले संगठन अध्यक्ष महेंद्र भट्ट व मंत्रियों को काले झंडे दिखाए जा रहे हैं।

चुनावी साल में जनता की समस्याओं के हल के लिए संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम, उपनलकर्मियों के तोहफे और यूसीसी के एक साल की उपलब्धि को भी संगठन मतदाताओं तक ठोस तरीक़े से नहीं पहुंचा पा रहा।

कार्यक्रम में प्रशासन ने कमर तो खूब कसी।  फरियादी भी खूब उमड़ रहे हैं। सीएम धामी ने भो इस जन अभियान की निगरानी के विशेष निर्देश भी दिए। लेकिन ‘राजनीतिक बादलों’ ने अभियान की उपलब्धियों पर ग्रहण लग दिया।

अपने ही बयानों में फंसे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट लगातार काले झंडे देखने को विवश हैं। विभिन्न मुद्दों पर हो रहे आंदोलन से कार्यकर्ता असमंजस में है। चुनावी साल की शुरुआत में सरकार के जन कार्यक्रमों की गूंज इन विरोध प्रदर्शन के शोर में दब सी गयी।

बीते साल 17 दिसम्बर से सीएम धामी के निर्देश पर “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत राज्य की तहसील व विकास खंडों में ग्रामीण जनता की समस्याओं के हल के लिए बहुउद्देशीय शिविर लगाए गए।
न्याय पंचायत स्तर पर लगे इन शिविरों में प्रभारी मंत्री व विधायकों की ड्यूटी भी लग रही है। जनता को राहत भी मिल रही है।
लेकिन जनता की समस्याओं के हल से जुड़े इस जन अभियान के कुछ दिन बाद ही अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित वीआईपी का जिन्न बाहर निकल आया।
दरअसल, भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बीच बीआईपी को लेकर निजी पलों में हुई वार्ता का ऑडियो वॉयरल होते ही दिल्ली तक शोर मच गया।
लगभग एक महीने पहले शुरू हुई वीआईपी की चर्चा गट्टू, फट्टू, टट्टू के इर्द गिर्द सिमट गई। विपक्षी दलों के हमले के बीच अंकिता भंडारी हत्याकांड के कई किरदार सामने आने लगे। मुकदमे दर्ज हुए। भाजपा प्रभारी दुष्यंत गौतम ने भी नोटिस दिए मुकदमे दर्ज कराए।
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत भाजपा के कई नेताओं ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग कर भाजपा की अंदरूनी राजनीति को नया मोड़ दे दिया।


इतना ही नहीं, कथित वीआईपी को लेकर सुरेश राठौर -उर्मिला सनावर के वायरल ऑडियो के अलावा आरती गौड़,भावना पांडे, उषा राणा माहे, निर्दलीय विधायक उमेश कुमार,अजेय, स्वामी दर्शन भारती, पदम् भूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी के ‘अवतरण’ व  बयानों ने बवंडर मचाया हुआ है।
हर दिन नया वीडियो व ऑडियो से जमकर रायता फैल रहा है। कौन कहां और किससे जुड़ा हुआ है,यह कहानियां भी चटखारे लेकर सुनाई जा रही है। सत्ता के गलियारों में हर दिन एक नया ‘विस्फोट’ हो रहा है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने वीआईपी के मुद्दे पर दिल्ली में प्रेस करने के बाद भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। उक्रांद समेत अन्य आंदोलनकारी जन संगठन के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के बाद धामी सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति तो कर दी। लेकिन विपक्षी दल व अंकिता के माता-पिता अभी भी सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं। इस मसले पर एक नयी जंग की भी तैयारी हो रही है।

गिरधारी साहू का लड़की खरीद बयान

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी साहू के बिहार में 20-25 हजार में लड़की खरीद सम्बन्धी बयान ने भी आग में घी का काम किया। जनवरी के पहले सप्ताह में वॉयरल हुए इस वीडियो के बाद महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला व पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में गिरधारी साहू पर मुकदमे को लेकर आंदोलित हैं। लेकिन साहू पर अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

किसान सुखवंत आत्महत्या केस

इसी बीच 11 जनवरी को काशीपुर के किसान सुखवंत की आत्महत्या से एक नया विवाद शुरू हो गया। सुखवंत ने आत्महत्या से पहले वीडियो बयान जारी कर यूएसनगर के एसएसपी समेत कई पुलिसकर्मियों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए।
इस मुद्दे पर गदरपुर से भाजपा विधायक  अरविंद पांडे ने सीबीआई जॉच की मांग कर अपनी ही सरकार को घेर डाला। विपक्षी दल कांग्रेस ने दून में पुलिस मुख्यालय का घेराव किया।
इस मुद्दे पर एक दर्जन पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं।
इधऱ, जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर हुए अवैध निर्माण कार्य को लेकर विधायक अरविंद पांडे के घर पर नोटिस चस्पा कर दिया है। विधायक पांडे ने भी प्रशासन को पत्र देकर सरकारी जमीन पर हुए निर्माण कार्य को तोड़ने के बाबत पत्र दिया है।


भाजपा की इस अंदरूनी राजनीति पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल तो हाथ सेंक ही रहे हैं बल्कि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत व सांसद अनिल बलूनी भी आज 22 जनवरी को विधायक अरविंद पांडे से मिलने जा रहे हैं।
त्रिवेंद्र-बलूनी के गदरपुर कूच से भाजपा की अंदरूनी राजनीतिक खेल भी नया मोड़ लेगा। इसके अलावा तीन दिन पहले किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ के पुत्र पर रात में हुए हमले से भी राजनीति गर्म है। भाजपा के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी अरविंद पांडे और बेहड़ के समर्थन में उतर आए हैं।


दिसम्बर के दूसरे पखवाड़े से इन कई मुद्दों ने ‘जन-जन की सरकार, जन; जन के द्वार ‘ कार्यक्रम के सन्देश को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। चुनावी साल में  भाजपा के रणनीतिकार  इस कार्यक्रम के बहाने आम जनता तक पहुंचने की कोशिश में थे। लेकिन इन मुद्दों पर जारी राजनीतिक व सामाजिक आंदोलनों व बयानों में स्वंय प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट बुरी तरह घिर गए।


जन ;जन की सरकार कार्यक्रम की उपलब्धि को  मतदाताओं तक पहुंचाने के बजाय प्रदेश अध्यक्ष के कई स्थानों पर हो रहे घेराव ने भो भाजपा को चिंता में डाल दिया है। यही नहीं, अंकिता हत्याकांड के मुद्दे पर मीडिया से बातचीत करने आये राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल  को भी तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।


भाजपा सूत्रों का भी मानना है कि हालिया ज्वलंत मुद्दों पर जनता के सड़क और उतरने से भाजपा कार्यकर्ता भी डिफेंसिव मोड में आ गए हैं। नतीजतन, नये साल में सरकार की नीतियों और उपलब्धि का प्रचार प्रसार नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में यूसीसी के एक साल पूरा होने पर भी कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हुआ। यही नहीं उपनलकर्मियों के हक में हुए कैबिनेट फैसले को भी पार्टी संगठन व जनप्रतिनिधि जनता के सामने असरदार ढंग से नहीं ले गए।

अंकिता, गिरधारी, सुखवंत समेत अन्य मुद्दों पर जारी आंदोलन के अभी और खिंचने की उम्मीद है। भाजपा संगठन के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट  व मंत्रियों को काले झंडे दिखाने की विपक्षी मुहिम के भी तेज होने की संभावना है।

लाखों लोगों को मिली सुविधा

इधऱ, सरकार ने नया आंकड़ा पेश करते हुए कहा है कि
21 जनवरी 2026 तक प्रदेश के सभी जनपदों में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के अंतर्गत कुल 427 कैम्पों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 3 लाख 44 हजार 85 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की है।

सीएम धामी का कहना है कि
समस्याओं का त्वरित समाधान, सेवाओं की सरल उपलब्धता और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना—यह सब इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड सरकार सुशासन के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रही है….

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