कांग्रेस ने कहा, सरकारी जमीनों को किया जा रहा खुर्द बुर्द

दून से सटी कई एकड़ जमीन निजी हाथों में देने की तैयारी-कांग्रेस

नेता विपक्ष ने  ऊर्जा सचिव को घेरा

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। गैरसैंण बजट सत्र में भाजपा के मंत्रियों की सफल घेराबंदी से उत्साहित कांग्रेस ने देहरादून में भो हमला जारी रखा।
नेता विपक्ष यशपाल आर्य व प्रीतम सिंह ने संयुक्त रूप से भाजपा पर हमला बोलते हुए कई मुद्दों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। यह भी कहा कि ईमानदार अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिल रहा है। और सरकारी जमीनों को निजी हाथों में देने की तैयार हो रही है।

रविवार को विधानसभा स्थित कक्ष में हुई प्रेस वार्ता में ,कांग्रेस ने सरकारी जमीनों को खुर्द बुर्द करने के आरोप लगाते हुए सरकार से स्थिति साफ करने को कहा।

यशपाल आर्य ने कहा कि विकासनगर, डाकपत्थर, मसूरी और यमुना कॉलोनी में सरकारी और सिंचाई विभाग की कीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।

नेता विपक्ष ने कहा कि विकासनगर क्षेत्र की जल विद्युत परियोजनायें के चलते 1952 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किसानों को जमीनें उपलब्ध करवाई थी लेकिन अब वो जमीन खुर्दबुर्द करने की तैयारी चल रही है।

  उन्होंने कहा कि विकासनगर जल विद्युत परियोजना की 76 एकड़ जमीन है और उसे खुदबुर्द करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सचिव मीनाक्षी सुंदरम यह बताएं कि क्या सरकारी जमीनों को निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है सरकार ?

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बहुचर्चित
उद्यान घोटाले की जांच रोकने के लिए सरकार ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा तक खटखटाना था। लेकिन उद्यान विभाग के घोटाले पर उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था नतीजतन,सरकार ने प्रबंध निदेशक को उसके मूल राज्य में उसे रिलीव कर दिया था।

ईमानदार अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिल रहा -आर्य

विधान सभा स्थित कक्ष सं. 120 में प्रेस वार्ता करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और राज्य के बजट को लेकर सरकार को कड़े शब्दों में घेरा और कहा कि उत्तराखण्ड में शासन-प्रशासन की स्थिति अत्यंत चिंताजनक होती जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं बल्कि शिष्टाचार बनता जा रहा है। सरकार भले ही “जीरो करप्शन” का नारा देती हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि भर्ती, ठेकों, योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानांतरण तक हर स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में शिकायतें मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने के बावजूद समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, जिससे जनता के बीच यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को संरक्षण मिल रहा है।
उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच विभिन्न योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आए हैं।
आर्य ने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2022 के बाद अपराधों की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजधानी देहरादून में अल्प समय के भीतर कई हत्याओं की घटनाएँ होना अत्यंत चिंताजनक है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में ईमानदार अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिल रहा, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।

वास्तविकता से मुंह मोड़ने वाला बजट

उन्होंने कहा कि हालिया बजट प्रदेश की वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़ने वाला बजट है। इसमें न तो आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने की स्पष्ट योजना दिखाई देती है और न ही बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का कोई ठोस खाका है।
उन्होंने कहा कि राज्य पर बढ़ते कर्ज, हजारों रिक्त सरकारी पदों, पलायन, किसानों की समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों पर बजट में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गैरसैंण के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय बढ़ाने और पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस नीति और बजटीय प्रावधानों की आवश्यकता है।

प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के अलावा विधायक प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन, विक्रम सिंह नेगी, लखपत सिंह बुटोला व लालचंद शर्मा उपस्थित रहे।

(‘अविकल उत्तराखण्ड’ ने ऊर्जा सचिव से सरकारी पक्ष जानने की कोशिश की। सरकार का पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा)

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