कृषि उत्पादों के निर्यात हेतु एनपीओपी-एनओपी प्रमाणन अनिवार्य

हाउस ऑफ हिमालयाज – योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन और कौशल आधारित प्रशिक्षण पर जोर

अविकल उत्तराखण्ड


देहरादून। सचिव ग्राम्य विकास धीराज सिंह गर्ब्याल ने मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम तथा वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक में जनपदों द्वारा स्वीकृति हेतु भेजी गई कार्य योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। सचिव ने निर्देश दिए कि पिछले वर्ष तक स्वीकृत योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए।


उन्होंने सभी मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रस्तावित योजनाओं की इकाई लागत विभागीय मानकों के अनुरूप निर्धारित की जाए, ताकि संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो सके। प्रशिक्षण से संबंधित योजनाओं को एनएसक्यूएफ मानकों के अनुसार प्रस्तावित करने तथा कौशल विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित सामान्य लागत मानकों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए। आरसेटी के माध्यम से कराए जा सकने वाले प्रशिक्षण आरसेटी के अंतर्गत तथा विशेष विषयों पर आवश्यक प्रशिक्षण मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से संचालित किए जाएं।
सचिव ने रोजगार एवं स्वरोजगार परक प्रशिक्षणों की आवश्यकता के आकलन हेतु सभी जनपदों में स्किल गैप एनालिसिस तत्काल कराने के निर्देश दिए। इसमें पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी, रिटेल सर्विसेज, सूचना प्रौद्योगिकी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, ऐपेरल, कृषि एवं बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रीन जॉब्स सहित कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों पर विशेष फोकस करने को कहा गया। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सेवायोजन विभाग से बेरोजगार युवाओं का डेटा एकत्र कर प्रशिक्षण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिससे अधिकतम युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।
सचिव ग्राम्य विकास ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के तहत कृषि उत्पादों के निर्यात प्रक्रिया को सुदृढ़ करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीजीएस के अंतर्गत कृषिकरण को एनपीओपी एवं एनओपी स्तर तक लाना अनिवार्य है, क्योंकि बिना इन प्रमाणनों के कृषि उत्पादों का निर्यात संभव नहीं है। सभी जनपदों को निर्देश दिए गए कि वे विकासखंड या क्लस्टर स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एनपीओपी एवं एनओपी मानकों के अनुसार कृषि एवं औद्यानिकीकरण प्रारंभ करें।
इसके साथ ही पीजीएस, एनपीओपी एवं एनओपी के अंतर्गत कार्य कर रहे गांवों एवं क्लस्टरों की सूची विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि इनका नियमित अनुश्रवण किया जा सके और इनके उत्पादों का पायलट आधार पर ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के अंतर्गत निर्यात किया जा सके। सचिव ने कहा कि यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि राज्य के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
बैठक में सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम एवं वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यटन आधारित समेकित योजनाएं तैयार कर, कृषि, बागवानी एवं पशुपालन गतिविधियों को सम्मिलित करते हुए, संशोधित कार्य योजनाएं अगले सप्ताह तक राज्य को भेजने के निर्देश दिए गए। बैठक में अपर सचिव अनुराधा पाल, संयुक्त विकास आयुक्त संजय सिंह, परियोजना प्रबंधन अधिकारी डॉ. प्रभाकर बेबनी सहित सभी मुख्य विकास अधिकारी उपस्थित रहे।

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