गट्टू,फट्टू और टटू भी ‘चमके ‘
गैरसैंण सत्र में 41 घंटे 10 मिनट चली कार्यवाही
तीखी नोक झोंक के बीच 12 विधेयक पारित
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के गैरसैंण बजट सत्र में विपक्ष के हमलों के बीच सत्ता पक्ष को कई मसलों पर तीखा विरोध झेलना पड़ा।
चुनावी साल में सरकार ने बजट को जनोपयोगी करार देने का दावा कर किसान,महिलाएं,युवाओं सहित विभिन्न सेक्टर को लुभाने की कोशिश की। वहीं,विपक्ष ने जनहित से जुड़े कई मसलों पर मंत्रियों को घेरने में कामयाबी पाई।
कानून व्यवस्था,भ्रष्टाचार, घोटाले,अवैध खनन समेत शिक्षा ,स्वास्थ्य के सवाल पर तीखे प्रहार किए। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज वो संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल पर विपक्ष की विशेष ‘ दया दृष्टि’ भी देखने को मिली।
कांग्रेस व उक्रांद ने सदन के बाहर भी शक्ति दिखाकर भाजपा सरकार पर दबाव बनाया।
विपक्ष ने सरकार के मंत्रियों को घेरने के अलावा अफसरशाही की मनमानी को भी आड़े हाथ लिया।
सीएम धामी ने बजट भाषण में सरकार की विकास योजनाओं का खाका खींचा। लेकिन विपक्ष ने भ्रष्टाचार,शराब,खनन,आपदा समेत विभागीय कमियों पर सत्ता को घेरकर माहौल को गर्म किए रखा।
कई बार मंत्रियों और विपक्ष की जंग निजी स्तर पर भी उभरी। मुन्ना-प्रीतम और मंत्री सुबोध – काजी निजामुद्दीन विवाद सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। कुपोषण पर मंत्री उनियाल की टिप्पणी को विधायक काजी ने असंसदीय करार दिया।
स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने विधायकों की गैरहाजिरी और निजी टिप्पणियों पर नाराजगी जाहिर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।स्पीकर ने विशेषाधिकार हनन समेत कई अन्य मुद्दों पर विपक्ष को बोलने का खूब मौका दिया।और सरकार को जवाब देने के लिए बारम्बार मजबूर भी किया। इससे कई मौकों पर सरकार को असहज भी होना पड़ा।

अंकिता भंडारी मुद्दा छाया
सदन में अंकिता भंडारी मुद्दे पर भी सरकार को घेरा गया। इशारों ही इशारों में भाजपा के बड़े नेता को भी इंगित किया गया। नेता विपक्ष यशपाल आर्य,अनुपमा रावत व हरीश धामी ने इस ज्वलंत मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भाजपा के पूर्व विधायक की पत्नी ने गट्टू,फट्टू और टट्टू का जिक्र किया। यह भी कहा कि
बुलडोजर किसने चलाया। और क्या कार्रवाई हुई। नेता विपक्ष ने जोर देकर पूछा कि यह
अनिल जोशी कौन हैं। क्या अंकिता भंडारी के रिश्तेदार हैं।
इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने अपने एजेंडे को धार दी। जबकि सीएम धामी ने उपयोगी बजट के आंकड़े पेश किए।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वहन किया और विभिन्न नियमों के तहत सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में जनहित से जुड़े ठोस प्रावधान नहीं हैं और सरकार ने कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए।
कांग्रेस के विधायकों ने भी विभागीय सवालों को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि कई मामलों में मंत्रियों के पास स्पष्ट जवाब नहीं थे। वहीं भाजपा विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि विपक्ष ने केवल राजनीतिक बयानबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में शामिल नहीं हुई और बाद में सत्र की अवधि को लेकर सवाल उठाती रही।

उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र शनिवार को समाप्त हो गया। 9 मार्च से शुरू हुआ यह सत्र पांच दिनों तक चला और कुल 41 घंटे 10 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली।
इस दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के साथ 12 विधेयक और चार अध्यादेशों को सदन की मंजूरी मिली।
सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस भी देखने को मिली। प्रश्नकाल, शून्यकाल और विभिन्न नियमों के तहत विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश की, जबकि सत्ता पक्ष ने सत्र को विकास और नीतिगत फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
सत्र के दौरान सदन को कुल 50 अल्पसूचित प्रश्न और 545 तारांकित प्रश्न प्राप्त हुए। इनमें से 291 प्रश्नों के उत्तर सरकार की ओर से दिए गए। विपक्ष ने सत्र की अवधि और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने सत्र को सकारात्मक और जनहितकारी बताया।

बजट सत्र की प्रमुख उपलब्धियां
– वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पारित
– कुल 12 विधेयकों को मंजूरी
– चार अध्यादेशों को स्वीकृति
– पांच दिन तक चली सदन की कार्यवाही
– कई महत्वपूर्ण नीतिगत संशोधनों को मंजूरी
बजट सत्र एक नजर में
सत्र की अवधि : 5 दिन
कुल कार्यवाही : 41 घंटे 10 मिनट
अल्पसूचित प्रश्न : 50
तारांकित प्रश्न : 545
उत्तर दिए गए प्रश्न : 291
मंजूर अध्यादेश : 4
पारित विधेयक : 12
सदन में पास हुए प्रमुख अध्यादेश
– उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनिमन और सेवा शर्त) संशोधन अध्यादेश 2025
– उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025
– उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश 2025
– उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026
सदन में पारित प्रमुख विधेयक
– उत्तराखंड दुकान और स्थापना (संशोधन) विधेयक 2026
– उत्तराखंड जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026
– उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026
– समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक 2026
– उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक 2026
– उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक 2026
– उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक 2026
– उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक 2026
– उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026
– उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक 2026
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