वीआईपी सबूत – राठौर-उर्मिला को तलाश रही पुलिस

वीआईपी नैतिकता के मुद्दे पर याद आये L K व M L

सीएम आवास कूच- विपक्षी दल व संगठनों ने झोंकी ताकत

पहाड़ से लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन जारी

अविकल थपलियाल

देहरादून। बात निकली भी और दूर तक चली भी गयी। अंकिता हत्याकांड पर दलित सम्बन्धी बयान देने से भाजपा संगठन अध्यक्ष महेंद्र भट्ट व विधायक खजान दास की किरकिरी होने के बाद प्लान बी पर काम किया गया।
प्लान बी के तहत कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सरकार का पक्ष रखने के लिए मीडिया के सामने आए। दून स्थित भाजपा मुख्यालय में शुक्रवार को हुई पत्रकार वार्ता में सुबोध उनियाल बारम्बार यह दोहराते रहे कि विश्वसनीय सबूत लाएं, सरकार जॉच के लिए तैयार है।
उन्होंने नाम तो नहीं लिया लेकिन पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर की वॉयरल बहुचर्चित ऑडियो क्लिप में अंकिता के ‘सुसाइड’ लिए जाने की बात को भी बार बार रेखांकित किया।
मंत्री उनियाल ने यह भी कहा कि ‘सुसाइड’ की बात करने वाले मामले को भटकाना चाहते है। ताकि अभियुक्तों की जमानत हो जाय।


इस प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने कई सवाल पूछ कर मंत्री उनियाल को उलझाया भी। लेकिन उनियाल प्रमुख तौर पर एक ही बात पर अडिग रहे कि विश्वसनीय सबूत दीजिये,सरकार जांच के लिए तैयार है।
उनियाल ने सुप्रीम व हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पढ़कर सुनाया,जिसमें सीबीआई जांच की याचिका को निरस्त कर दिया गया।
मंत्री उनियाल ने कहा कि कोर्ट भी एसआईटी जांच से संतुष्ट रही। और इस जांच के चलते ही लोअर कोर्ट ने पुलकित, सौरभ व अंकित को आजीवन कारा की सजा दी। और उनकी जमानत भी नहीं हुई।

इस प्रेस वार्ता के जरिये पहली बार सरकार का पक्ष सामने आया। जबकि इससे पूर्व वीआईपी के तौर पर दुष्यंत गौतम का नाम आने पर महेंद्र भट्ट व खजान दास के बयानों ने आग में घी का काम किया। संगठन के दलित कार्ड की भी खूब जग हंसाई हुई। जबकि ऑडियो क्लिप को वायरल करने वाले पूर्व विधायक सुरेश राठौर व उर्मिला सनावर दलित जाति से ही ताल्लुक रखते हैं।

योगिता भयाना

बहरहाल, अंकिता भंडारी हत्याकांड के वीआईपी को लेकर जारी ऑडियो क्लिप में भाजपा संगठन से जुड़े दो बड़े नेताओं दुष्यंत गौतम और अजेय कुमार का नाम आने के बाद विपक्षी दल व सामाजिक संगठन पहाड़ से लेकर दिल्ली तक सड़कों पर उतरे हुए है।
धरना-प्रदर्शन को लगभग एक पखवाड़ा हो गया है ।
प्रदेश के पहाड़ी कस्बों,गांवों में मशाल जुलूस के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

उधर,दिल्ली में मौजूद पर्वतीय संगठन से जुड़े कार्यकर्ता मेट्रो में अंकिता हत्याकांड से जुड़े पोस्टर लेकर बाहरी राज्यों के निवासियों को अपनी भावनाएं बता रहे हैं।
इधऱ, मुकदमा दर्ज होने के बाद भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर व अभिनेत्री उर्मिला सनावर भूमिगत हो गए हैं। दोनों के घरों में नोटिस चस्पा हो चुके हैं। उर्मिला अपनी हत्या की आशंका भी जता रही है। उर्मिला ने कहा है कि सुरक्षा मिलने पर वह सभी सबूत दे देगी ।
इस बीच, ‘परी’ संस्था की योगिता भयाना दून में आकर अंकिता के पक्ष में प्रेस वार्ता कर चुकी है। कई अन्य महिला एक्टिविस्ट सोशल मीडिया में वीआईपी को लेकर जनता को जागरूक कर रही है।

मंत्री सुबोध उनियाल


कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल,ज्योति रौतेला व हरक सिंह रावत पौड़ी जिले के विभिन्न कस्बों व शहरों में मशाल जुलूस निकाल कर 4 जनवरी के सीएम आवास कूच के लिए जनसमर्थन जुटा रहे हैं।
प्रदेश के मैदानी इलाकों हरिद्वार व यूएसनगर में भी प्रदर्शन की खबरें हैं। सांसद अजय भट्ट को काले झंडे दिखाए गए। जबकि दून में स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी के आवास का महिला कांग्रेस घेराव कर मुद्दे को जिंदा रखे हुए हैं।
भाजपा नेता त्रिवेंद्र रावत,विजया बड़थ्वाल की सीबीआई जांच के समर्थन में आये वक्तव्यों के बाद कुछ मंडल व जिला स्तरीय पार्टी नेताओं के इस्तीफे की खबरें भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
2022 के सितंबर महीने में हुए अंकिता हत्याकांड के तीन साल तीन महीने बाद वीआईपी का मुद्दा भाजपा के लिए गर्म दूध बन गया है। चूंकि, भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने उर्मिला को फोन पर कथित वीआईपी के तौर पर दुष्यंत गौतम और अजेय कुमार का नाम लिया। जबकि अन्य भाजपा नेताओं का भी जिक्र किया लेकिन नाम नहीं बताए।  लिहाजा , पुलिस की पूरी कोशिश राठौर-उर्मिला तक पहुंचने की है।
उर्मिला अपने आखिरी वीडियो में हत्या की आशंका जताई है। मामला तलवार की धार पर टिक गया है। भाजपा के अंदर से भी आंदोलन को हवा मिलने के भी संकेत मिल रहे हैं।

मशाल जुलूस सुदूर पैठाणी में

4 जनवरी के दून में होने वाले प्रदर्शन को लेकर राजनीति का तापमान कई गुना बढ़ गया है। कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस व खुफिया तंत्र भीड़ के सम्भावित आंकलन में जुटा है। इस कूच में विपक्षी दल, आंदोलनकारी संगठन व कई सामाजिक संगठन से जुड़े लोग शामिल होंगे।

इधऱ, आसन्न संकट के हल के लिए कथित वीआईपी के नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। और तीस साल पहले हुए चर्चित हवाला कांड का उदाहरण भी दिया जा रहा है, जब हवाला डायरी में कोडवर्ड में लिखे ML (मदन लाल खुराना) और LK (लाल कृष्ण आडवाणी) नाम  के सार्वजनिक होने के बाद आडवाणी और खुराना ने नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा दे दिया था…..

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