‘वीआईपी’ को क्यों बचा रही है धामी सरकार- माहरा

सीबीआई जांच और वीआईपी का नाम सार्वजनिक करें

सलट,अल्मोड़ा। उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने रविवार को सल्ट विधानसभा क्षेत्र में अंकिता भंडारी न्याय यात्रा में सरकार पर प्रहार किए।

जनसभा को संबोधित करते हुए करन माहरा ने कहा कि यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता के धैर्य के टूटने और सरकार के प्रति गहराते अविश्वास की अभिव्यक्ति है। हर कदम और हर नारा इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की जनता अब आधे-अधूरे न्याय और लीपापोती को स्वीकार नहीं करेगी।


करन माहरा ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज भी सबसे बड़ा सवाल जस का तस खड़ा है कि आखिर वह ‘वीआईपी’ कौन है, जिसे बचाने के लिए एक बेटी को आज तक पूरा न्याय नहीं मिल पाया।
भाजपा के पूर्व विधायक एवं मंत्री का वायरल ऑडियो, जिसमें कथित रूप से वीआईपी के नाम का खुलासा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक बेटी की निर्मम हत्या के बाद भी सरकार निष्पक्ष सीबीआई जांच से बचने का हर संभव प्रयास कर रही है।


बुलडोजर चलाकर सबूत मिटाने के आरोप, प्रशासनिक अधिकारियों के बदलते बयान और अब वायरल ऑडियो—ये सभी घटनाक्रम सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अगर सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो सीबीआई जांच से डर कैसा?
करन माहरा ने कहा कि यह मामला केवल अंकिता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की साख और राज्य निर्माण के मूल उद्देश्यों से जुड़ा प्रश्न है। क्या राज्य का गठन इसलिए हुआ था कि सत्ता और रसूख के आगे न्याय को कुचल दिया जाए? क्या आंदोलनकारियों ने बलिदान इसलिए दिए थे कि सामान्य परिवार की बेटियों की आवाज दबा दी जाए?


उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी और प्रदेश की जनता मांग करती है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की तत्काल निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए, वीआईपी का नाम सार्वजनिक किया जाए और दोषियों को किसी भी राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिलता, तब तक यह संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा। यह लड़ाई सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है।


इस अवसर पर सल्ट विधानसभा क्षेत्र की महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में न्याय यात्रा में शामिल हुए और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की एकजुट मांग उठाई।

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