विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित बनाने पर दिया जोर
अविकल उत्तराखंड
डोईवाला। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट में हेल्थकेयर रिसर्च एवं बायोस्टैटिस्टिक्स” विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस दौरान कार्यशाला में स्वास्थ्य अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और विश्वसनीय बनाने में गहन मंथन किया गया।
हिम्स जौलीग्रांट के बीसी रॉय सभागार में क्लिनिकल रिसर्च विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन एसआरएचयू के प्रति कुलपति डॉ. अशोक कुमार देवरारी ने किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शोध कार्य का नैतिक, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित होना बेहद जरूरी है। सही शोध और ठोस आंकड़ों के आधार पर ही बेहतर चिकित्सा नीतियाँ और उपचार की पद्धतियाँ विकसित की जा सकती हैं।
क्लिनिकल रिसर्च विभागाध्यक्ष डॉ. निक्कू यादव ने बताया कि स्वास्थ्य शोध में बायोस्टैटिस्टिक्स (सांख्यिकीय विश्लेषण) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। यदि शोध की योजना और आंकड़ों का विश्लेषण सही तरीके से किया जाए तो परिणाम और अधिक विश्वसनीय होते हैं और रोगियों के उपचार में भी बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।
इस दौरान आयोजित अकादमिक सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया। इनमें डॉ. आर. जे. यादव पूर्व निदेशक ग्रेड वैज्ञानिक एनआईएमएस आईसीएमआर दिल्ली, हिम्स जौलीग्रांट के डॉ.ए.के श्रीवास्तव, एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ के डॉ. अनूप कुमार, सह संस्थापक क्लिनिकल वेदा हैदराबाद सुशांत ने बायोस्टैटिस्टिक्स, शोध की रूपरेखा, सैंपल चयन की प्रक्रिया और क्लिनिकल डेटा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरल और व्यावहारिक जानकारी दी। इस दौरान प्रतिभागियों ने प्रश्नोत्तर और चर्चा सत्र में सक्रिय भागीदारी की। कार्यशाला के सफल संचालन में डॉ. रूचि जुयाल, डॉ. मनीषा शर्मा, डॉ. विषु चौहान, डॉ. गीता भंडारी, डॉ. विशाल राजपूत, डॉ. विभोर शर्मा, चारु पालीवाल, आकांक्षा उनियाल, अभिनव बहुगुणाा पूजा सहित संकाय सदस्यों ने अपना योगदान दिया।

