देखें आदेश,आईएएस कर्मेन्द्र सिंह व पीसीएस अजयवीर को किस विभाग में मिली तैनाती
कर्मेन्द्र सिंह को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में जिम्मेदारी
अजयवीर सिंह को डोईवाला चीनी मिल का अधिशासी निदेशक बनाया
54 करोड़ की जमीन खरीद मामले में दोनों अधिकारी रहे कार्रवाई के दायरे में
अविकल थपलियाल
देहरादून। हरिद्वार नगर निगम के बहुचर्चित डंपिंग यार्ड भूमि खरीद घोटाले में निलंबित हुए आईएएस व पीसीएस अधिकारी को नई जिम्मेदारी दे दी गयी है।
गौरतलब है कि जून 2025 में 54 करोड़ की भूमि खरीद के मामले की शासन स्तर व विजिलेंस जांच के बाद कई अधिकारी निलंबित किये गए थे।
जून 2026 में सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी की सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की थी। जबकि तत्कालीन डीएम कर्मेन्द्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई का निर्णय लिया गया। और तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने तथा परनिंदा प्रविष्टि की कार्रवाई की गई थी।
कूड़ा घर से सटी जमीन से जुड़े इस सनसनीखेज घोटाले की शासन स्तर पर आईएएस रणवीर चौहानं ने जांच कर कड़े कदम उठाए जाने की अनुशंसा की थी।
इस बीच, शासन ने दो अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी है। 25 अगस्त 2026 को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार आईएएस अधिकारी कर्मेन्द्र सिंह को अपर सचिव, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के पद पर तैनाती देने का निर्णय लिया गया है। वहीं, पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह को अधिशासी निदेशक, चीनी मिल डोईवाला के पद पर तैनात किया गया है।

कर्मेन्द्र सिंह और अजयवीर सिंह दोनों ही हरिद्वार नगर निगम की विवादित भूमि खरीद मामले में कार्रवाई के दायरे में रह चुके हैं। हरिद्वार नगर निगम ने ग्राम सराय में कूड़ा डंपिंग स्थल के पास करीब 2.307 हेक्टेयर भूमि लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। जांच में भूमि की उपयोगिता और खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे थे।
जिस भूमि की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये के आसपास बताई गई, उसके लिए निगम ने 54 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
इस मामले में जून 2025 में तत्कालीन जिलाधिकारी एवं नगर निगम के प्रशासक कर्मेन्द्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी और तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह समेत सात अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
इनके साथ वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की, रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश कुमार और हरिद्वार तहसील के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास भी निलंबित किए गए थे।
प्रकरण में पहले से कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल तथा संपत्ति लिपिक वेदपाल भी शामिल रहे। इनमें कुछ के निलंबन, सेवा विस्तार समाप्त करने अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई की गई थी।

इस मामले में संलिप्त पाए गए अधिकारियों और तथ्यों को छिपाकर जमीन बेचने वाले व्यक्तियों सुमन देवी, जितेंद्र कुमार आदि समेत कुल 10 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा गया है।
जांच में यह भी सामने आया था कि बिना साठ गांठ के सरकार को करोड़ों का फटका लगाने में सोची समझी साजिश रची गयी। इस घपले का ताना बाना 2023 के आस पास बुनना शुरू हुआ था।
अब 25 अगस्त के शासनादेश में कर्मेन्द्र सिंह को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी और अजयवीर सिंह को डोईवाला चीनी मिल में अधिशासी निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है। शासन के इन आदेशों के बाद हरिद्वार भूमि प्रकरण से जुड़े अधिकारियों की नई तैनाती को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।



